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ये आरटीई की सीट देंगे केवल नर्सरी में पर सामान्य से एडमिशन लेते हैं चार बार

स्कूल प्रबंधन की ओर से नर्सरी से लेकर बारहवीं तक एक ही स्कूल है ये बात कही जाती है

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स्कूल प्रबंधन की ओर से नर्सरी से लेकर बारहवीं तक एक ही स्कूल है ये बात कही जाती है

रायगढ़. प्रायवेट स्कूलों में जब शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने की बारी आती है तो स्कूल प्रबंधन की ओर से नर्सरी से लेकर बारहवीं तक एक ही स्कूल है ये बात कही जाती है। लेकिन जब सामान्य बच्चों को प्रवेश देने की बारी आती है तो उक्त संस्था के पास तीन से चार स्कूलों में परिवर्तित हो जाती है।


शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रवेश देने के लिए आरक्षित सीट 25 प्रतिशत नर्सरी कक्षा में दी जाती है लेकिन इन्हीं स्कूलों में तीन बार एडमिशन की फीस वसूली जा रही है।

इसके तहत नर्सरी में एक बार एडमिशन फीस ली जाती है इसके बाद प्रायमरी स्कूल यानि पहली कक्षा में, फिर मीडिल स्कूल यानि छठी कक्षा में इसके बाद हायर सेकण्डरी स्कूल यानि 11 वीं में एडमिशन लिया जा रहा है, जबकि सामान्य प्रवेश लेने वाला बच्चा कक्षा नर्सरी से उसी स्कूल में पढ़ रहा है, लेकिन बारहवीं तक पढ़ते हुए वो तीन से चार बार एडमिशन ले चुका होता है।

वहीं कई प्रायवेट स्कूल तो हर साल अभिभावकों से वार्षिक फीस के अलावा एडमिशन फीस के नाम से राशि वसूल रहे हैं। एडमिशन फीस के नाम पर प्रायवेट स्कूल संचालक तीन हजार रुपए से लेकर 6 हजार रुपए तक की राशि अभिभावकों से वसूल रहे हैं।


कुलमिलाकर देखा जाए तो प्रायवेट स्कूल संचालक शिक्षण सामग्री अलावा फीस और अब एडमिशन फीस के नाम पर भी अभिभावकों को लूट रहे हैं। अभिभावकों की जेब ढीली कर स्कूल प्रबंधन एडमिशन फीस के नाम पर शुद्ध लाभ उठा रहा है। इसको लेकर अभिभावक परेशान तो हैं लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर जानते हूए भी लूट के शिकार हो रहे हैं और इसका लाभ प्रायवेट स्कूल संचालक उठा रहे हैं।


क्या कहता है नियम
एक ही कैंपस में एक ही नाम से अलग-अलग स्कूल का संचालन करने के लिए शिक्षा विभाग और संबंधित बोर्ड से अलग-अलग मान्यता व संचालन की अनुमति लेनी होगी। लेकिन जिले में संचालित स्कूलों में देखा जाए तो अधिकांश प्रायवेट स्कूलों में एक संस्था के नाम से एक ही मान्यता है और एडमिशन फीस के लिए जानबूझकर वर्ग में बांटा गया है।


होती है चालाकी
प्रायवेट स्कूल प्रबंधन एडमिशन के समय जानबूझकर समय निर्धारित कर देते हैं। अधिकांश तौर पर यह देखने को मिलता है कि एडमिशन के लिए दो से तीन दिन का समय दिया जाता है वहीं किताब खरीदने के लिए भी दो से तीन दिन का समय दिया जाता है। ताकि किसी का ध्यान इस पर नहीं जाए।