21 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मजदूरी कि राशि मांगने पर भड़क गया रोजगार सहायक बोला मेरा जो करना है कर लो

पंचायत व ग्रामीण पुछते रहे और रोजगार सहायक बैठक से हो गया नदारद

2 min read
Google source verification
raigarh news in hindi,life of raigarh,raigarh administration,

पंचायत व ग्रामीण पुछते रहे और रोजगार सहायक बैठक से हो गया नदारद

रायगढ़. ग्राम पंचायत द्वारा आयोजित विशेष बैठक में जब रोजगार सहायक को दो वर्ष से लंबित मनरेगा की मजदूरी राशि को लेकर सवाल पुछा गया तो रोजगार सहायक ने कहा मेरा जो करना है कर लो और बैठक में जनप्रतिनिधि, ग्रामीण व पीडि़त मजदूर बैठे रहे वह उठकर भाग गया।

रोजगार सहायक की मनमानी व मजदूरों की पीड़ा को लेकर उजाला ग्राम संगठन और पीडि़त मजदूरों ने कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराते हुए मजदूरों को मजदूरी भुगतान कराने की मांग की है।

कलक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से पीडि़त मजदूर और उजाला ग्राम संठन के महिला पदाधिकारियों ने अवगत कराया है कि ग्राम पंचायत नौरंगपुर में 2015-16 में तालाब गहरीकरण व डभरी निर्माण का कार्य मनरेगा के तहत स्वीकृत हुआ।

स्वीकृति के बाद गांव के मजदूरों ने उक्त दोनो कार्य में अपना योगदान दिए लेकिन मजदूरी भुगतान नहीं मिल पाया। रोजगार सहायक व अन्य अधिकारी पिछले दिनों तक आश्वासन देते रहे लेकन जब इस मामले में पीडि़तों को आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिला तो पीडि़तों ने गांव में आयोजित होने वाली उजाला ग्राम संगठन की बैठक में इस बात को रखा।

इसके अलावा अन्य कई मुद्धों को लेकर गांव में पंचायत के पदाधिकारियों ने आवश्यक बैठक आहुत की गई। इसमें अन्य मुद्धों पर चर्चा होने के बाद जब उक्त मजदूरों के भुगतान की बात सामने आई तो रोजगार सहायक कुछ कहने से इंकार कर दिया और रोजगार सहायक ने जो करना है कर लो कहते हुए बैठक की प्रक्र्रिया का पालन किए बगैर ही उठकर चले गया। इसके कारण मजदूरों के उक्त समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। इसको लेकर कलक्टर से पीडि़त व उजाला संगठन ने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मजदूरों को मजदूरी राशि दिलाने की मांग की है।


निकासी पर्ची में पहले ही करा लिया दस्तखत
शिकायत में यह भी बताया गया है कि रोजगार सचिव व पोस्ट मास्टर की मिलीभगत से मजदूरो ंको घर-घर जाकर भुगतान करने का आश्वासन देते हुए मजदूरों के यहां जाकर आहरण पर्ची में दस्तखत करा लिया गया।लेकिन जब लंबे समय तक इसमें राशि मजदूरों को नहीं मिली तो यह मामला खुलकर सामने आया।