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वर्धा की तर्ज पर नवा रायपुर में बनेगा 21वीं सदी का सेवाग्राम

- मुख्यमंत्री ने 75 से 100 एकड़ जमीन चिन्हित करने के दिए निर्देश- निर्माण में मिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का होगा उपयोग

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रायपुर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम-स्वराज की संकल्पना को नवा रायपुर में साकार करने के लिए वर्धा की तर्ज पर सेवाग्राम बनाया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नवा-रायपुर में 75 से 100 एकड़ की जमीन चिन्हांकित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, संस्थान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं आत्मनिर्भर-ग्राम की कल्पना को साकार करने के लिए सभी प्रकार के कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री 2 अक्टूबर से पहले इस संबंध में कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है।

इस सेवा-ग्राम का निर्माण मिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हुए किया जाएगा। यह परियोजना गांधी-दर्शन को याद रखने और सीखने की प्रेरणा देगी। साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन की यादों और राष्ट्रीय इतिहास को भी इसके माध्यम से जीवंत रखा जा सकेगा।

नवा रायपुर के सेवाग्राम में यह रहेगा खास

- यहां ग्रामीण कला और शिल्प के केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां अतिथि विषय-विशेषज्ञों अपना मार्गदर्शन देंगे।
- बुजुर्गों के लिए यहां वृद्धाश्रम बनाया जाएगा।

- शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए स्कूल का निर्माण होगा।
- स्थानीय कला और शिल्प, स्थानीय व्यंजनों को बारे में जानकारी दी जाएगी।
- एक ओपन थियेटर होगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

यह है सेवा-ग्राम बनाने का उद्देश्य
इसका उद्देश्य पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देना, छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को प्रोत्साहन देना, बुजुर्गों को दूसरा-घर देकर और वैचारिक आदान-प्रादन के लिए छत्तीसगढ़ में एक विश्वस्तरीय व्यवस्था का निर्माण करके स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण करना है। सेवा-ग्राम में प्रस्तावित वजिटर्स सेंटर सीखने, निर्वाह करने और गांधी के सिद्धांतों का स्मरण करने का केंद्र होगा।

वर्धा में 1936 में हुई थी स्थापना
इस परियोजना के पीछे महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम है, जिसकी स्थापना वर्ष 1936 में महात्मा गांधी और उनकी सहधर्मिणी कस्तूरबा के निवास के रूप की गई थी, ताकि वहां से वे मध्य भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर सकें। वर्धा का यह संस्थान महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप ग्रामीण भारत के पुननिर्माण का केंद्र भी था। गांधीजी का मानना था कि भारत की स्थितियों में स्थायी रूप से सुधार के लिए ग्राम-सुधार ही एकमात्र विकल्प है। अब 21वीं सदी में महात्मा गांधी के उन्हीं सपनों के अनुरूप ग्राम सुधार के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए नवा-रायपुर में सेवाग्राम की स्थापना की जा रही है।