
डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पदभार (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Raipur Police Commissioner: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज से पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली औपचारिक रूप से लागू हो गई है। इस नई व्यवस्था के तहत आईपीएस डॉ. संजीव शुक्ला ने रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में शुक्रवार को पदभार ग्रहण किया। डॉ. संजीव शुक्ला ने जीई रोड स्थित नवस्थापित पुलिस कमिश्नर कार्यालय में ज्वाइनिंग दी। इस अवसर पर शहर के सभी एसीपी, डीसीपी समेत पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रायपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है। नई प्रणाली के तहत रायपुर जिले का पुनर्गठन करते हुए इसे दो पुलिस जिलों- रायपुर शहरी और रायपुर ग्रामीण में विभाजित किया गया है।
रायपुर शहरी क्षेत्र की पुलिसिंग की जिम्मेदारी अब पुलिस आयुक्त, रायपुर शहरी के पास होगी, जो पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रैंक का अधिकारी होगा। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने, त्वरित निर्णय लेने तथा अपराध नियंत्रण में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर पुलिस जिले के तहत आने वाले 21 थाना क्षेत्रों को कमिश्नरेट सीमा में शामिल किया गया है। इन सभी थाना क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था अब सीधे पुलिस आयुक्त के अधीन होगी। इनमें प्रमुख रूप से-
राज्य गठन के 25 वर्ष के बाद पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरुआत रायपुर शहर से हो रही है। यह पुलिस अधिकारियों के लिए और पुलिस सिस्टम के लिए उत्साह और चुनौती दोनों का विषय है। उत्साह और खुशी इसलिए क्योंकि वर्षों से पुलिस अधिकारियों की यह इच्छा थी कि पुलिस अधीक्षक के स्थान पर पुलिस कमिश्नर बने और उन्हीं इच्छाओं के कारण कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था में मुख्य बदलाव आए।
इस प्रणाली से आईएएस-आईपीएस में कुछ टकराव हो जाएगा या कुछ पावर शिफ्ट या पावर लॉस जैसी कुछ बातें होंगी। यह बात निश्चित रूप से निराधार है, क्योंकि आईएएस और आईपीएस के काम पहले से ही अलग हैं। जिला कलेक्टर के पास विकास के सारे काम हैं और पुलिस अधिकारियों के पास अपराध नियंत्रण करने का काम है। विकास तभी संभव है जब जन-जीवन सुरक्षित हो। वर्षों तक पुलिस अधिकारी के रूप में काम करते-करते मैंने अनुभव किया है कि यदि पुलिस अपना काम सही ढंग से करे, पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करे, तो जन-मानस पुलिस के प्रति विश्वास रखता है और पुलिस का सम्मान करता है।
जिस तरह से महानगरों में अपराध बढ़ रहे हैं, चुनौती बढ़ाने की बजाय पुलिस कमिश्नर ज्यादा सफल प्रयोग रहा है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलूरु, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में इस प्रणाली ने अपराध नियंत्रण में पर्याप्त सफलता प्राप्त की है। रायपुर पिछले 25 वर्ष में बहुत बदल गया है। बढ़ती आबादी, बढ़ता हुआ शहरीकरण और अत्यंत कठिन ट्रैफिक व्यवस्था रायपुर पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। तेजी से बनते हुए महानगर में अपराधों की संख्या और उनका स्वरूप भी उसी अनुसार बढ़ा है।
पुलिस कमिश्नर के पास मजिस्ट्रेट पावर आ जाने से कानून-व्यवस्था को सुधारने में निश्चित सफलता मिलेगी। गुंडा-बदमाशों को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने का अधिकार पुलिस के पास रहने से अपराधियों में खौफ भी रहेगा।
Published on:
23 Jan 2026 03:19 pm
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