
इंदिरागांधी कृषि विवि के इन तीन स्टार्टअप को मिला अवॉर्ड
ताबीर हुसैन @ रायपुर.इंदिरा गांधी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के रफ्तार एग्रीबिजनेस इन्क्यूबेटर (राबी) से एफिलेटेड तीन स्टार्टअप को दिल्ली में अवॉर्ड मिला है। इंडिया टेक फस्र्ट स्टार्टअप के तहत अलग-अलग कैटीगरी में यह अवॉर्ड प्राप्त हुए हैं। इसमें काश हित इनोवेशन ने बेस्ट स्टार्टअप फॉर इनोवेशन इन एग्रीटेक, मलहारी प्रोजेक्ट्स ने बेस्ट स्टार्टअप इनोवेशन फॉर स्मार्ट सिटीस, बोवाज एग्री एनॉलिटिक्स ने बेस्ट डाटा साइंस कंपनी का अवॉर्ड जीता है। कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया काउंसिल फॉर रोबोटिक्स एण्ड ऑटोमेशन (एआईसीआरए) ने 25-26 अप्रैल को द यूनाईटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया दिल्ली में किया। यह एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन जो मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी से समर्थित है। इन तीनों स्टार्टअप को आईजीकेवी राबी के उद्भव प्रोग्राम से मदद और अनुदान मिला है। देशभर से 300 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने इसमें पार्टिसिपेट किया था।
एक क्लिक में बीज से मार्केट
राजधानी के सदर बाजार निवासी हकीमुद्दीन सैफी ने एमबीए किया है। वे कुछ साल से डेटा साइंस बिजनेस एनॉलिटिक्स पर काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें आइडिया आया कि कोई ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएं जिससे किसानों को बीज खरीदी से लेकर उपज को बेचने का मार्केट एक ही जगह मिल जाए। इसलिए हमने क्रॉप-वे नाम का एक ऐप और वेबसाइट बनाई। आगे रुरल इंडिया में एग्री इकोनॉमी आनी है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना भी हमारे स्टार्टअप का मकसद है।
आईजीकेवी से फंडिंग : 18 लाख रुपए
जॉब के दौरान वेस्ट देख आया आइडिया
अहमदाबाद के रहने वाले 27 वर्षीय मिहिर दीक्षित ने बताया, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बाद मैं फार्मा कंपनी में जॉब कर रहा था। इस दौरान मैंने वेस्ट देखा। तब आइडिया आया कि वेस्ट को लेकर कुछ ऐसा डिजाइन कर सकते हैं जिससे कोई सलूशन निकल पाए। हम म्युनिसिपल, फार्मा कंपनी और हॉस्पिटल को मशीन बनाकर देते हैं।
पेट्रोल महंगा हुआ तो बना दी बैटरी वाली स्प्रे मशीन
दुर्ग निवासी रितेश 2004 में बीएससी एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी करने के बाद पिता के साथ किसानी में लग गए । खेती में आने वाली चुनौतियों का समाधान तलाशने स्टार्टअप किया। वे बताते हैं, पहले मैं पेट्रोल से चलने वाली मशीन बनाता था। जैसे ही पेट्रोल के दाम बढऩे लगे और किसानों की लागत और परेशानी बढऩे लगी तो मैंने लिथियम आयन फेरो फास्फेट बैटरी से इलेक्ट्रिक स्प्रे मशीन बनाई। यह एक बार चार्ज होने पर 5 से 7 घंटे तक आसानी से चलती है। रितेश ने बताया, पहले किसानों को पारंपरिक एवं आधुनिक विधि से खेती में स्प्रे करने पर 200 से 300 रुपए प्रति एकड़ का खर्च आता था हमारे स्प्रे करने पर मात्र 4 से 5 रुपए का खर्च ही आता है।
आईजीकेवी से फंडिंग: 21 लाख रुपए
Published on:
26 Apr 2023, 11:12 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.