
शराब घोटाले में 3200 करोड़ का सिंडिकेट बेनकाब(photo-patrika)
CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के रायपुर शराब घोटाला करने के लिए पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाया था। दोनों ने मिलकर 29 आबकारी अधिकारी-कर्मचारी और अपने करीबी लोगों को सिडिंकेट में शामिल किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक उनकी मिलीभगत से 3200 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। इसमें काम करने वाले अधिकारियों को 88 करोड़ से ज्यादा कमीशन मिला। जबकि अकेले अनवर ढेबर को 90 करोड़ से ज्यादा की राशि मिली थी।
इसे अनवर ने परिजनों,रिश्तेदारों, करीबी लोगों और सीए के नाम पर कई कंपनियो में निवेश किया। यह रकम शराब डिस्टलर्स से कमीशन और बी पार्ट की शराब बिक्री से मिली थी। इसका 15 फीसदी अनिल और अनवर तक विकास अग्रवाल और सुब्बू की मदद से पहुंचता था। दोनों शराब दुकानों से पैसा वसूलने का काम करते थे। वहीं पूर्व आईएएस ने अपने पुत्र यश के माध्यम से अचल संपत्ति में निवेश किया।
नवीन प्रताप सिंह तोमर ने 39 खसरे में 3 रजिस्ट्री के जरिए बलौदा बाजार एवं रायपुर में इंदिरा देवहारी, नवीन प्रताप सिंह के नाम पर, प्रमोद कुमार नेताम ने 6 संपत्ति कोरिया, कोरबा और रायपुर में प्रमोद कुमार नेताम, इंदिरा नेताम, शिशिर नेताम, ईशा नेताम, बालकृष्ण नेताम के नाम पर, मोहित कुमार जायसवाल ने 3 संपत्ति बेमेतरा में तुलसा देवी जायवाल, संतोषी, सरही के नाम पर, दिनकर वासनिक ने 2 संपत्ति रायपुर और राजनांदगांव में पन्ना लाल वासनिक के नाम पर खरीदी और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन में निवेश किया।
इकबाल अहमद खान ने 3 संपत्ति रायपुर में डॉ. प्रमोद तिवारी, सुकृति तिवारी, इकबाल अहमद खान के नाम पर, विजय सेन शर्मा ने 1 संपत्ति बिलासपुर में गुजन मिश्रा के नाम पर, नीतिन कुमार खंडूजा ने 7 संपत्ति रायपुर और बिलासपुर में नीतिन खंडूजा के नाम पर, अरविंद कुमार पाटले ने 2 संपत्ति मुंगेली में अशोक कुमार चंद्राकर के नाम खरीदी।
आयकर विभाग को पूर्व आईएएस के ठिकानों में छापेमारी के दौरान अनवर के साथ मोबाइल में मिले चैट में लेनदेन की जानकारी मिली थी। कमीशन की रकम दोनों कांग्रेस पदाधिकारियों, आबकारी अधिकारियों को देते थे। विकास अग्रवाल के अक्टूबर-नवंबर 2022 में विदेश भागने के कारण अब तक पूछताछ नहीं हो पाई है।
बता दें कि 2017 में नई शराब नीति लागू होने के बाद शासन का नियंत्रण था लेकिन, 2019 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इसका जमकर दुरुपयोग किया गया। अनिल और अनवर ने मिलकर अपने करीबी अधिकारियों-कर्मचारियों को सिंडिकेट में शामिल कर जमकर कमीशनखोरी की।
बता दें कि शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त को गिरफ्तार किया गया है। नोहर सिंह ठाकुर ने 5 संपत्ति रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में करुणा सुधाकर, लवकुश नायक, विजय लाल जाटवर, नोहर सिंह ठाकुर के नाम से खरीदी।
जर्नादन कौरव ने 4 संपत्ति रायपुर और राजनांदगांव में पत्नी सीमा सिंह कौरव, रतना सिंह, लोकनाथ यदु के नाम पर खरीदी। मंजूश्री कसेर ने 25 संपत्ति रायपुर, जांजगीर, गरियाबंद में सुरेश कुमार, रामचंद्र सारस, पुनीत राम, सुशीला देवी सारस, समय लाल धृतलहरे, प्रियंका तिवारी, करुणा करण गणेश मूर्ति, योगेंद्र कुमार, संतोष कुमार, अनिता यादव, अनिल खोरब्रारागढ़े, सुष्मिता भारतीय, सुनील पटेल, शशि प्रभा पांडेय, अंजू साहू, नीलम राठौर, योगिता पादार्थ, मनमोहन अग्रवाल और माला सिंह के नाम पर खरीदी।
Updated on:
11 Jul 2025 12:02 pm
Published on:
11 Jul 2025 11:56 am
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