
कुपोषण के अभिशाप से धमतरी जिले के 350 बच्चे हुए मुक्त
धमतरी. लॉकडाउन के दौरान जिले में कुपोषण मोर्चे पर राहतभरी खबर है। बीते छह महीने में कुपोषण का ग्राफ काफी नीचे गिरा है। पहले जिले में 23 फीसदी बच्चे कुपोषित थे, जो घटकर 10.18 फीसदी पर आ
गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में 1103 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं, जहां बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई जाती हैं। साथ ही जो बच्चे कुपोषित होते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान चलाकर पोषक आहार दिया जाता है। लॉकडाउन की अवधि में धमतरी में पूरक पोषक आहार योजना का अच्छा प्रतिसाद मिला है। बीते छह महीने मेें कुपोषण के ग्राफ में 7 फीसदी का सुधार आया है। इस तरह पहले जिले में 23 फीसदी बच्चे कुपोषित थे, जो अब 10.8 फीसदी में पहुंच गया। इस तरह 12.82 बच्चे पूरक आहार मिलने से स्वस्थ्य हो गए। महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत जिले में कुल 155 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। 2 अक्टूबर 2019 से शुरू हुए इस अभियान में 2652 बच्चे सामान्य रूप से कुपोषित मिले थे। इसी तरह 668 बच्चे मध्यम तथा 124 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित मिले थे। इन बच्चों को सामान्य स्तर पर लाने के लिए सभी चयनित आंगनबाड़ी केन्द्रों में विशेष अभियान चलाया गया। तेजी से बच्चे सुपोषित हो गए।
लगातार घट रहा ग्राफ
गौरतलब है कि बीते साल अक्टूबर महीने में कुल 792 मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चे थे, जो घटकर मार्च 2020 में 493 हो गए। इसके बाद अप्रैल महीने में फिर से रेडी टू ईट आदि बांटा गया, जिससे कुपोषण का ग्राफ और घट गया। इस महीने तक जिले में कुल 442 बच्चे कुपोषित पाए गए। अर्थात छह महीने के अंतराल में 350 बच्चे कुपोषण की काली छाया से निकल कर सुपोषित हुए। अप्रैल की स्थिति में जिले में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे सिर्फ 69 बचे है। मध्यम कुपोषित 367 तथा सामान्य कुपोषित 3006 बच्चे है।
Published on:
04 Jun 2020 01:27 am
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