रायपुर . छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल में पांच माह में दूसरी बार मौत का तांडव देखने को मिला, जब एक के बाद एक 4 बच्चों की मौत खबर सामने आई। इस खबर ने एक ओर जहां स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। वहीं अस्पताल परिसर में चारों ओर केवल रोने की चीखें ही सुनाई पड़ रही है। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाहीपूर्वक इलाज किए जाने का आरोप लगाया है। बतादें कि पिछले साल 21 अगस्त 2017 को अंबेडकर अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 4 बच्चों की मौत हो गई थी।
अस्पताल के वार्ड नंबर- 1 (पीडियाट्रिक) के आईसीयू में शिफ्ट किए गए 4 बच्चों की मौत की खबर से शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा मचाया। वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार करते हुए मौतों का भेद छिपाने रिपोर्ट ही बदल दी।
अस्पताल प्रबंधन ने यह बताई मौतों की वजह
कुशालपुर निवासी राकेश सोनी और लीना सोनी के 48 दिन के बालक को 29 दिसंबर 2017 को निजी अस्पताल से अंबेडकर अस्पताल रेफर किया गया। वह 15 दिन से निजी अस्पताल में भर्ती था। उपचार के दौरान 11 जनवरी को तड़के 3 बजे बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बच्चे को एक्सट्रीमली लो वेट (1400 ग्राम वजन) विद सेप्सिस एंड शॉक के कारण संक्रमण हो गया था।
मोहम्मद मोसीन पिता मो. शकील उम्र 14 वर्ष, राजिम जिला गरियाबंद को अन्य अस्पताल से इनसेफेलाईटिस के साथ-साथ गैस्पिंग अवस्था में भर्ती किया गया। उसे रेसापाइरेटरी फेल्योर (श्वांस अवरोध) होने से वेंटीलेटर पर रखा गया था। साथ ही मोसीन का ब्रेन डेड हो चुका था, जिससे शरीर का अन्य अंग भी काम करना बंद कर दिया था।
एक महीने की बेबी भव्या राजनांदगांव के जिला चिकित्सालय से सीवियर निमोनिया तथा सस्पेक्टेड कंजनाइटल हार्ट डिजीज के शिकायत के साथ ९ जनवरी को चिकित्सालय में भर्ती हुई थी। मरीज की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसकी 10 जनवरी को दोपहर 2.30 बजे मृत्यु हो गई।
एक वर्षीय बच्ची वेदकुमारी पिता प्रेमलाल को 10 जनवरी की रात 9.40 बजे महासमुंद से गेस्पिंग की स्थिति में लाई गई थी। मरीज को मेंनिग्जाइटिस के कारण स्थिति गंभीर थी, लगभग दो घंटे बाद 11.45 बजे उपचार के दौरान मौत हो गई। बच्ची को केवल सीपीआर (चेस्ट कंप्रेशन) ही दिया जा सका।
प्रबंधन पर डेढ़ लाख की पेशकश करने का आरोप
परिजनों ने ‘पत्रिका’ को बताया कि बच्चे को सुबह तक स्वस्थ बताया जा रहा था, लेकिन 10 बजे के बाद अचानक मौत की खबर दी गई। वहीं सर्दी-खांसी की रिपोर्ट में फेरबदल करते हुए बे्रन डेड का रिपोर्ट भी तैयार कर लिया गया और वही मीडिया को दिखाया गया। यही नहीं बच्चे की मौत के बदले अस्पताल प्रबंधन ने डेढ़ लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने की भी बात कही थी। मौके पर अस्पताल प्रबंधन सहित मृतकों के परिजन मौजूद थे। वहीं तहसीलदार नंद कुमार सिन्हा भी मौके पर पहुंच कर हंगामा रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
बच्चों की मौत के बाद घंटों चलता रहा हंगामा
बच्चों की मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों ने बताया कि यहां डॉक्टर बच्चों को आईसीयू में ले जाने के बाद से देखने तक नहीं जाते। वहीं सीनियर डॉक्टर तो कभी इलाज करने आते ही नहीं। अस्पताल प्रबंधन ने दो बच्चों की मौत की पुष्टि की है।
रायपुर अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि चिकित्सकों द्वारा बच्चों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है, एक बच्चे को संक्रमण था, वहीं दूसरे बच्चे को ब्रेन डेड के बाद लाया गया था। दो अन्य बच्चे भी गंभीर अवस्था में अन्य अस्पतालों से लाए गए थे, उपचार के दौरान बच्चों की मौत हुई है। परिजनों का आरोप बेबुनियाद है।