
तीन डॉक्टर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Raipur SRIMSR Bribery Case: रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (एसआरआईएमएसआर) को मान्यता दिलाने और सीटे बढ़ाने के नाम पर 55 लाख की रिश्वत लेने वाले 6 आरोपियों के रैकेट को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
इसमें कर्नाटक स्थित मंड्या इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के प्रोफेसर डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ चैत्रा एमएस (निरीक्षण टीम की सदस्य) डॉ अशोक शैलके, रावतपुरा सरकार के निदेशक अतुल कुमार, सतीश ए और के रविचंद्र शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से 3 मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध डॉक्टर हैं। उक्त सभी को गिरफ्तार करने के बाद सभी को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में पूछताछ के लिए 5 दिन की रिमांड पर लिया है। उक्त सभी से वीआईपी रोड स्थित सीबीआई दफ्तर में पूछताछ की जाएगी।
बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाए जाने को लेकर देशभर के विभिन्न निजी कॉलेजों में लेनदेन करने की शिकायत मिली थी। मिले इनपुट के आधार पर सीबीआई ने एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ समेत मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश के विभिन्न शहरों में छापेमारी की। साथ ही रायपुर और बेंगलूरु में छापेमारी कर उक्त सभी को गिरफ्तार किया गया है।
बताया जाता है कि मान्यता दिलाने और सीटे बढ़ाने के नाम पर 1 करोड़ 62 लाख रुपए पहले ही दिए जाने की जानकारी मिली है। ओके रिपोर्ट देने के नाम पर 55 लाख रुपए की दूसरी किस्त दी जा रही थी। यह रकम बेंगलूरु के डॉ. रविंद्र और सतीश को दिए गए थे। सीबीआई ने छापेमारी कर 16.62 लाख रुपए डॉ. चैत्रा के पति रविंद्रन के पास से और 38.38 लाख रुपए सतीश ए. के पास से बरामद करने का दावा किया गया है।
मेडिकल कॉलेज मान्यता देने के लिए गठित टीम के डॉक्टरों और अफसरों ने कॉलेज प्रबंधन से मिलीभगत कर निरीक्षण टीम की जानकारी पहले लीक कर दी थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेजों ने घोस्ट फैकल्टी, नकली मरीज और फर्जी उपस्थिति जैसे फॉर्मूले अपनाकर निरीक्षण को अनुकूल दिखाया। इस फर्जीवाडे़ के एवज में निरीक्षण टीम को रिश्वत दी गई।
सीबीआई के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामले में रावतपुरा कॉलेज संचालक और अधिकारियों के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कुछ अफसरों की भूमिका संदेह के दायरे में है। अब तक की जांच में सभी की संलिप्ता मिली है। इसे देखते हुए उक्त सभी से पूछताछ कर बयान लिया जाएगा।
सीबीआई का कहना है कि एनएमसी द्वारा नामित 4 मूल्यांकनकर्ताओं वाली निरीक्षण टीम 30 जून 2025 को एसआरआईएमएसआर रायपुर में निरीक्षण के लिए पहुंची। इस दौरान निरीक्षण दल के सभी 4 सदस्यों ने एसआरआईएमएसआर के निदेशक अतुल कुमार तिवारी के साथ गोपनीय बैठक हुई थी।
साथ ही कॉलेज को मान्यता देने और सीटे 150 से 250 करने के एवज में अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने के लिए सौदा हुआ था। इसमें से करोड़ो रुपए की रिश्वत का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने की जानकारी भी मिली है। यह सारा कुछ फोन पर डील किया गया था।
छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में भी कार्रवाई की गई है। इस दौरान सीबीआइ टीम को कई संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं।
सीबीआई को छापेमारी के आरोपियों के ठिकानों और रावतपुरा कॉलेज में तलाशी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले है। इसमें आरोपियों के मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा, फाइलें, संदेश और स्क्रीनशॉट सहित अन्य शामिल गए हैं।
Updated on:
03 Jul 2025 10:26 am
Published on:
03 Jul 2025 10:26 am
