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छत्तीसगढ़: बड़ी संख्या में मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल, सामने आई ये सच्चाई

छत्तीसगढ़ में महज 6 माह के भीतर मतदाता सूची से 63 हजार 728 नाम हटाये गए हैं वहीं एक लाख 33 हजार 56 नाम जोड़े गए हैं।

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आवेश तिवारी/रायपुर. छत्तीसगढ़ में महज 6 माह के भीतर मतदाता सूची से 63 हजार 728 नाम हटाये गए हैं वहीं एक लाख 33 हजार 56 नाम जोड़े गए हैं। इसी अवधि में 47 हजार 810 नामों का संशोधन किया गया है। यह स्थिति तब है जब राज्य की मतदाता सूची में लगातार खामियों की शिकायत आती रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल कहते हैं कि आयोग को बताना चाहिए कि जो नाम हटाये गए वो किनके हैं। गौरतलब है कि फर्जी वोटरों की शिकायत पर वर्ष 2013 की विधानसभा चुनाव में डोर टू डोर सर्वे कराया गया था, लेकिन आज भी भारी संख्या में मृतकों के नाम मतदाता सूची में हैं।

पिछले दिनों बिलासपुर की मतदाता सूची में अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री बीआर यादव सूची में जीवित पाए गए थे जबकि उनका निधन तीन साल पहले हो चुका है, उनके पुत्र स्व.अरविंद यादव का नाम भी सूची में मिला था। पिछले दिनों नई मतदाता सूची में 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के साढ़े तीन हजार से ज्यादा मतदाताओं का नाम सामने आया था, जिसकी आयोग जांच करा रहा है।

राज्य में महज 6 महीने की अवधि में 63 हजार मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में कई विधानसभा सीटें ऐसी है जिनमे उम्मीदवारों की हार जीत का अंतर बहुत कम रहा है ।वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में राज्य में कुल 24 सीटें ऐसी थी जिनमे उम्मीदवारों की 5 हजार से कम मतों से जीत हार हुई थी। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आयोग ने इस तरह के साफ्टवेयर का निर्माण किया है जो मतदाता सूची में डुप्लीकेट एंट्री को अपने आप हटाता जाता है।

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2008 की तुलना में वर्ष 2013 में मतदाताओं की संख्या में तकरीबन 16 लाख 77 हजार मतदाताओं की वृद्धि हुई थी। 2003 से 2008 के बीच में भी लगभग 16 लाख 74 हजार वोटर बढे थे, लेकिन 2013 के बाद से लेकर इस वर्ष 31 जुलाई तक केवल 12 लाख 83 हजार वोटर ही बढे हैं ।31 जुलाई को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 81 लाख 79 हजार 435 थी। जानकारो की माने तो मतदाताओं के प्रतिशत वृद्धि दर में जनसंक्या वृद्धि के बावजूद कमी या स्थिरता बताती है कि या तो राज्य में बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है या फिर मतदाता सूची के निर्माण में कोई कमी है ।

नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 831 है जबकि 2013 विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में इनकी संख्या 649 थी। दिलचस्प यह है कि निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद किसी भी थर्ड जेंडर ने वर्ष 2013 में मतदान नहीं किया था। ड्राफ्ट सूची में पुरुषों की संख्या 91 लाख 46 हजार 99 है और महिलाओं की संख्या 90 लाख 32 हजार 505 है यानीकि पुरुष मतदाताओं की संख्या महिला मतदाताओं से लगभग 1 लाख 13 हजार ज्यादा है। आयोग के अनुसार प्रदेश में पिछले 6 माह के दौरान 10921 मतदाताओं के शिफ्ट किये जाने की भी सूचना मिली है। गौरतलब है कि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 27 सितंबर को किया जाएगा। इस सूची के आधार पर विधानसभा चुनाव होगा।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि मतदाताओं की वृद्धिदर घट रही है ,यह जानना होगा कि आदिवासी दलित या फिर किस समुदाय का नाम काटा जा रहा है जबकि जनसंक्या लगातार बढ़ रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य 21 अगस्त 2018 तक चलेगा। इसमें 31 अगस्त तक दावा-आपत्ति की जा सकती है। इसके बाद फाइनल पब्लिकेशन किया जाएगा।