
छत्तीसगढ़ में 76 फीसदी आरक्षण का मामला: राज्यपाल बोलीं- बिल को समर्थन, वैधानिक परीक्षण के बाद हस्ताक्षर
76 percent Reservation in Chhattisgarh: विधानसभा में पारित संशोधित आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल अनुसुईया उइके संभवत: सोमवार को हस्ताक्षर कर सकती हैं। राज्यपाल उइके ने कहा, पारित विधेयक का वैधानिक परीक्षण कराना भी जरूरी है। इसके बाद इस पर हस्ताक्षर करूंगी। उन्होंने कहा, कोई भी विधेयक जब आता है, तो उसका परीक्षण किया जाता है। इसकी एक प्रक्रिया होती है। शनिवार को छुट्टी हो गई है। रविवार को अवकाश है। इसके अलावा मेरे विधि विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं। मुझे लगता है कि सोमवार को इस विधेयक पर हस्ताक्षर हो जाएगा। बता दें कि शुक्रवार की देर रात 5 मंत्रियों ने राज्यपाल को संशोधित विधेयक सौंपा था।
राज्यपाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, विधेयक आने के बाद सचिवालय से हमारे विधि विशेषज्ञ के पास आता है। सबसे आखिरी में उसे मेरे पास भेजते हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि विधानसभा में विधेयक पास हो और तत्काल साइन हो जाए। राज्यपाल ने कहा, आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए या फिर अध्यादेश लाया जाए, इसकी पहल मैंने की थी। सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर संशोधन विधेयक पारित किया है। इसे लेकर मेरा सकारात्मक सहयोग रहेगा। मैं सभी शासन-प्रशासन और विपक्ष के राजनीतिक दलों को धन्यवाद देती हूं कि आप ने आरक्षण 58 से बढ़ाकर 76 फीसदी कर दिया है।
आरक्षण के बहाने कर रहे राजनीति: चंदेल
विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा, कांग्रेस सरकार का आरक्षण देने की मंशा कम, राजनीति करना ज्यादा है। हमने तो संशोधन विधेयक लाया था। जिसमें अनुसूचित जाति (एससी) को 16 और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की थी, क्यों खारिज किया। भानुप्रतापपुर उपचुनाव में राजनीतिक लाभ लेने ये विधेयक पास किया गया है।
हार का बहाना खोज रही भाजपा: सीएम
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के बयान का पलटवार किया है। उन्होंने कहा, भाजपा भानुप्रतापपुर का उपचुनाव हार रही है, इसलिए वजह तलाश रहे है। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष चंदेल के बयान को मानसिक दिवालियापन बताया है। उन्होंने कहा, एक उपचुनाव में क्या फर्क पडऩा है। ये पूरे प्रदेश की जनता का मामला है।
विश्वास है राज्यपाल नहीं करेंगी विलंब
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यपाल ने अध्यादेश लाने या विशेष सत्र बुलाने की बात मीडिया के सामने कहीं थी। आदिवासी समाज के लोगों ने मुझसे कहा, अध्यादेश लाने की जगह विशेष सत्र बुलाकर इस पर चर्चा होनी चाहिए। उनकी मंशा के अनुरूप विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें सारे वर्ग के लिए प्रावधान किए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यपाल ने जो भावना व्यक्त की थी, उसमें विलंब नहीं करेंगी।
Published on:
04 Dec 2022 03:52 pm
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