
तिरपाल के नीचे पानी में प्रभु श्रीराम (फोटो सोर्स-पत्रिका)
Chandkhuri Ram Statue: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के लिए आई भगवान श्रीराम की नई भव्य प्रतिमा पिछले चार महीनों से घोर उपेक्षा का शिकार है। राजधानी से करीब 35 किलोमीटर दूर गोढ़ी गांव के एक खेत में इस 51 फीट ऊंची प्रतिमा को लावारिस हालत में सिर्फ एक तिरपाल से ढककर छोड़ दिया गया है। बारिश के कारण 80 लाख रुपए से अधिक की लागत से बनी यह प्रतिमा इस वक्त खेत के पानी में डूबी हुई है, और इसकी सुरक्षा के लिए न तो कोई शेड बनाया गया है और न ही कोई सुरक्षाकर्मी तैनात है।
दरअसल, कांग्रेस शासनकाल में स्थापित पुरानी मूर्ति की बनावट को अमर्यादित बताते हुए भाजपा सरकार के तत्कालीन संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 22 जनवरी 2024 को इसे बदलने की घोषणा की थी। विधानसभा में सहमति के बाद ग्वालियर से यह नई प्रतिमा मंगवाई गई। लेकिन वर्तमान मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है, इसलिए उसे हटाने को लेकर चंदखुरी मंदिर समिति और ग्रामीणों में संशय है।
मां कौशल्या जन्मभूमि सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा का कहना है कि वर्तमान मूर्ति चंदखुरी की पहचान बन चुकी है और शासन ने नई मूर्ति स्थापना को लेकर समिति से कोई चर्चा नहीं की है। इसी खींचतान और पर्यटन व संस्कृति विभाग की लेत-लतीफी के कारण यह ऐतिहासिक प्रतिमा खेतों में पडे़ रहने को मजबूर है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप भगवान श्रीराम की नई प्रतिमा शीघ्र ही स्थापित की जाएगी। प्रतिमा को खेत में असुरक्षित रखा गया है, इसकी मुझे जानकारी नहीं थी। मैं पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों को तत्काल निर्देशित करता हूं कि प्रतिमा की सुरक्षा, गरिमा और संरक्षण के लिए तुरंत पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
वाल्मिकी रामायण के अनुसार अयोध्यापति युवराज दशरथ के अभिषेक के अवसर पर कोसल नरेश भानुमंत को अयोध्या आमंत्रित किया गया था। ततो कोशल राजा भानुतमं समुद्रधृतम अर्थात राजा दशरथ जब युवराज थे, उनके अभिषेक के समय कोसल राजा श्री भानुमन्त को भी अयोध्या आमंत्रित किया गया था।
इसी अवसर पर युवराज द्वारा राजकुमारी भानुमति जो अपने पिता के साथ अयोध्या गईथी, उनकी सुंदरता से मुग्ध होकर युवराज दशरथ ने भानुमंत की पुत्री से विवाह का प्रस्ताव रखा, तभी कालांतर में युवराज दशरथ एवं कोसल की राजकन्या भानुमति का वैवाहिक संबंध हुआ। कोसल की राजकन्या भानुमति को विवाह उपरांत कोसल राजदूहिता होने के कारण कौशल्या कहा जाने लगा। रानी कौशल्या को कोख से प्रभु राम का जन्म हुआ।
Updated on:
13 Jul 2026 10:03 am
Published on:
13 Jul 2026 10:03 am
