
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र (photo source- Patrika)
रायपुर@राहुल जैन। विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। यह निर्णय रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की अध्यक्षता में हुई विधायक दल की बैठक में लिया गया। इसके अलावा कांग्रेस नकटी मामले को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाएगी।
बैठक में सभी नए विधायकों को पूरी तैयारी और तथ्यों के साथ अपनी बातों को रखने के लिए कहा गया है। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, टीएस सिंहदेव सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बता दें कि विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। सत्र के पहले दिन पंडवानी गायिका तीजन बाई को सदन में श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि सरकार ने प्रदेश की 3 करोड़ जनता के साथ धोखा किया है। ढाई साल में अपने वादों से मुकर गई है। इस सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। आम जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है। रेत को लिए लोगों को जिंदा जलाया जा रहा है। सूखे नशे की वजह से बच्चों का भविष्य खराब है। इस तरीके से कई मामलों को लेकर सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।
सदन में श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा भी उठेगा। विपक्ष का तर्क है कि राम मंदिर के निर्माण में छत्तीसगढ़ के लोगों का भी पैसा लगा है। इस वजह से इस मुद्दे को विपक्ष सदन (Chhattisgarh Monsoon Session 2026) में उठाएगा। इसे लेकर जमकर हंगामा हो सकता है।
छत्तीसगढ़ की विधानसभा में 10वीं बार अविश्वास प्रस्ताव पेश होगा। सबसे पहला अविश्वास प्रस्ताव तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष नंद कुमार साय ने जोगी सरकार के खिलाफ 2002 में पेश किया है। वहीं चतुर्थ विधानसभा में रमन सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने सबसे अधिक तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाया है। हालांकि अब तक सरकार के खिलाफ कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है। वहीं, भूपेश सरकार के समय नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और नारायण चंदेल अविश्वास प्रस्ताव लाए थे।
मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिन का हो, लेकिन इसके काफी हंगामेदार रहने के आसार है। विपक्ष पहले से ही राज्य में बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था, किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता, अवैध उत्खनन, जल संकट और अधूरी विकास योजनाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सत्तापक्ष के विधायक भी अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।
Updated on:
13 Jul 2026 09:34 am
Published on:
13 Jul 2026 09:34 am
