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Chhattisgarh Monsoon Session 2026: 5 दिन के मानसून सत्र में सरकार पर 1033 सवालों की बौछार, इन मुद्दों पर होगी घेराबंदी

Monsoon Session 2026: इस बार विधानसभा सचिवालय में सरकार से जवाब मांगने के लिए कुल 1033 प्रश्न लगाए गए हैं। बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था, खाद-बीज की कमी, अवैध उत्खनन, पेयजल संकट जैसे कई अहम मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
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Monsoon Session 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र (photo source- Patrika)

रायपुर@राहुल जैन। Chhattisgarh Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा का 5 दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 सवाल लगाए गए हैं, जिनके जरिए सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की तैयारी है। सत्र के दौरान विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों से जुड़े सवाल बड़ी संख्या में लगाए हैं।

मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिन का हो, लेकिन इसके काफी हंगामेदार रहने के आसार है। विपक्ष पहले से ही राज्य में बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था, किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता, अवैध उत्खनन, जल संकट और अधूरी विकास योजनाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सत्तापक्ष के विधायक भी अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

इस मुद्दों पर हंगामा होने के आसार

  • बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था: राज्य में लगातार सामने आ रही हत्या, लूट, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं को लेकर विपक्ष सरकार पर हमला बोलेगा। कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है।
  • किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता: खरीफ सीजन के बीच किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता बड़ा मुद्दा बन सकती है। कई जिलों से खाद की कमी और वितरण में अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं।
  • अवैध उत्खनन व जंगल कटाई: रेत, मुरुम और अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन का मुद्दा भी सदन में जोर-शोर से उठ सकता है। विपक्ष सरकार से कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल पूछेगा। इसके अलावा जंगल कटाई के मुद्दे को भी विपक्ष प्रमुखता से उठाएगा।
  • पेयजल योजनाओं की स्थिति: ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं की धीमी प्रगति और पेयजल संकट को लेकर भी सवाल उठेंगे। कई जगह योजनाएं शुरू होने के बावजूद लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है।
  • सड़क, बिजली और अधोसंरचना विकास: बरसात के मौसम में खराब सड़कों, बिजली आपूर्ति में बाधा और अधूरी निर्माण परियोजनाओं पर भी चर्चा संभावित है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं: स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे भी सदन में गूंज सकते हैं।