
Smart Meter (स्मार्ट मीटर बना नई परेशानी Photo Source- Patrika)
Chhattisgarh Smart Meter News: देवेंद्र गोस्वामी/दिनेश कुमार की रिपोर्ट. छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विरोध लगातार तेज हो रहा है। अधिक बिजली बिल, मीटर की कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि यह विरोध केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। पिछले तीन-चार वर्षों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम, त्रिपुरा और राजस्थान सहित कई राज्यों में स्मार्ट मीटर विवाद का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
फर्क सिर्फ इतना है कि कहीं सरकारों ने विरोध के बाद अपनी नीति में बदलाव किया, जबकि अधिकांश राज्यों में विरोध के बावजूद स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान जारी है। सबसे बड़ा बदलाव उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। लगातार विरोध, विपक्ष के आंदोलन और उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने मई 2026 में अनिवार्य प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था से पीछे हटते हुए पोस्टपेड व्यवस्था जारी रखने का निर्णय लिया। वहीं पश्चिम बंगाल में भी विरोध के बाद कुछ क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की गति धीमी की गई। इसके विपरीत बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम और त्रिपुरा में शिकायतों और विरोध के बावजूद सरकारों ने योजना वापस नहीं ली।
छत्तीसगढ़ में बिजली कंपनी के अनुसार स्मार्ट मीटर को लेकर अब तक करीब 8,500 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें लगभग 14 मीटरों में केवल डिस्प्ले खराब पाया गया, जिन्हें बदल दिया गया। वहीं 2,000 से अधिक मीटर बदलकर एक माह तक समानांतर परीक्षण किया गया, लेकिन किसी भी मामले में गलत रीडिंग प्रमाणित नहीं हुई। बिजली कंपनी का कहना है कि सामान्य मीटर से तुलना में भी रीडिंग समान मिली और सभी शिकायतों का निराकरण एक माह के भीतर किया गया।
हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिक बिल, बैलेंस तेजी से खत्म होने और बिलिंग प्रक्रिया को लेकर लोगों में भ्रम और असंतोष बना हुआ है। दूसरी ओर ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अध्ययन में यह सिद्ध नहीं हुआ है कि स्मार्ट मीटर स्वयं अधिक बिल बनाते हैं। कई मामलों में पुराने मीटर की कम रीडिंग, औसत बिलिंग समाप्त होना, गलत टैरिफ, वायरिंग या इंस्टॉलेशन की गड़बड़ी जैसी वजहें भी सामने आती हैं।
राज्य - क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश - विरोध के बाद सरकार ने अनिवार्य प्रीपेड व्यवस्था वापस लेकर पोस्टपेड मॉडल जारी रखा।
पश्चिम बंगाल - विरोध के बाद कई क्षेत्रों में स्थापना की रफ्तार धीमी हुई।
बिहार - अधिक बिल की शिकायतों के बीच विरोध जारी, योजना नहीं रुकी।
महाराष्ट्र - बड़ी संख्या में शिकायतें, जांच हुई लेकिन योजना जारी।
कर्नाटक - लागत और टेंडर विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा।
त्रिपुरा - राजनीतिक विरोध के बावजूद स्थापना जारी।
असम - विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर कायम।
राजस्थान - कई स्थानों पर उपभोक्ताओं का विरोध और शिकायतें।
छत्तीसगढ़ - शिकायतें बढ़ीं, लेकिन बिजली कंपनी का दावा- जांच में गलत रीडिंग नहीं मिली।
Updated on:
01 Aug 2026 11:11 am
Published on:
01 Aug 2026 11:11 am
