
एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध (photo source- Patrika)
Adulterated Paneer Ban: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) के निर्माण और बिक्री पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। पिछले पांच वर्षों से लाइसेंस के आधार पर संचालित इस कारोबार पर अब पूरी तरह रोक लग जाएगी। सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद राज्यभर में एनालॉग पनीर बनाने वाली करीब डेढ़ दर्जन फैक्ट्रियों के लाइसेंस निरस्त कर उन्हें सील किया जाएगा।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, अब तक ये फैक्ट्रियां दूध पाउडर, पाम ऑयल, शक्कर और नमक जैसी सामग्री से एनालॉग पनीर तैयार कर रही थीं। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि फैक्ट्रियां बंद होने के बाद भी चोरी-छिपे नकली पनीर का कारोबार पूरी तरह रुक पाएगा या नहीं।
एनालॉग पनीर को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि इसे करीब 200 रुपए प्रति किलो की लागत में तैयार कर 500 रुपए प्रति किलो के असली पनीर के नाम पर होटलों, ढाबों और रेस्तरां में बेचा जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी होने के साथ उनकी सेहत भी खतरे में पड़ रही थी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश के बाद विभाग ने कार्रवाई तेज की। विधि विभाग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसके बाद रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत कई शहरों में संचालित एनालॉग पनीर इकाइयों पर कार्रवाई होगी।
27 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के तहत एनालॉग पनीर बनाने के लिए FSSAI लाइसेंस जारी करता था। इसी वजह से अब तक खाद्य सुरक्षा विभाग छापेमारी के दौरान केवल गुणवत्ता में कमी या फैक्ट्री में गंदगी मिलने पर जुर्माना लगाता था। लेकिन अब राज्य सरकार के प्रतिबंध के बाद ऐसे लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में करोड़ों रुपए का कारोबार प्रभावित होगा। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ से हर दिन कई क्विंटल एनालॉग पनीर ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भी भेजा जाता था।
इस कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि फैक्ट्रियां बंद होने से सैकड़ों कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा। उनका तर्क है कि सरकार को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था भी करनी चाहिए। बड़ी फैक्ट्रियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और कई डेयरियों में भी स्थानीय स्तर पर एनालॉग पनीर तैयार किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन समय-समय पर ऐसे मामलों में कार्रवाई करता रहा है।
नियमों के अनुसार, होटलों और रेस्तरां को ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी देनी होती थी कि परोसा जा रहा पनीर एनालॉग है। साथ ही फैक्ट्री से इसकी सप्लाई "Analog Paneer" लिखी पैकिंग में ही की जानी थी। लेकिन जांच में पाया गया कि अधिकांश कारोबारी इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने बताया कि राज्य में एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को होटलों, ढाबों और बाजारों में नियमित जांच करने तथा दूसरे राज्यों से आने वाली एनालॉग पनीर की सप्लाई पर भी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
असली पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर मुख्य रूप से मिल्क पाउडर, पाम ऑयल (वनस्पति वसा), स्टार्च और अन्य सिंथेटिक एडिटिव्स से बनाया जाता है। आंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा के अनुसार, इसका लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसमें मौजूद सैचुरेटेड फैट शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। वहीं स्टार्च और सिंथेटिक तत्वों के कारण कब्ज, पेट फूलना और पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
Updated on:
01 Aug 2026 11:01 am
Published on:
01 Aug 2026 10:40 am
