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एक ब्रेनडेड मरीज बचा सकता है 8 जिंदगियां, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में हो रहा ये काम

Raipur Health Report : डीकेएस और आंबेडकर अस्पताल में हर महीने 12 ब्रेनडेड केस आते हैं। सबसे ज्यादा केस डीकेएस अस्पताल में आते हैं क्योंकि यहां न्यूरो ट्रामा है। ऐसे में हेड एंजुरी से जुड़े ज्यादातर केस यहीं पहुंचते हैं। डॉ. आंबेडकर अस्पताल में भी बहुत लोग ब्रेन हैमरेज लेकर पहुंचते हैं। इनमें भी कई ब्रेनडेड हो जाते हैं।

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एक ब्रेनडेड मरीज बचा सकता है 8 जिंदगियां, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में हो रहा ये काम

एक ब्रेनडेड मरीज बचा सकता है 8 जिंदगियां, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में हो रहा ये काम

Raipur Health Report : रायपुर प्रदेश में कैडेवर ट्रांसप्लांट का रास्ता 8 महीने से साफ है। इधर, रायपुर के डीकेएस और आंबेडकर अस्पताल में ही इस दौरान 96 ब्रेनडेड मामले सामने आ चुके हैं। यानी ऐसे लोग जिनके दिमाग ने पहले काम करना बंद किया। फिर शरीर ने भी साथ छोड़ दिया। स्टेट ऑर्नन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) को कैडेवर ट्रांसप्लांट के लिए इनमें से केवल 3 डोनर ही मिले। इनकी किडनी और लीवर से 9 जानें भी बचाई गईं। लेकिन, 104 जिंदगियों को अब भी डोनर का इंतजार है।

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हर माह 12 ब्रेनडेड केस

एक अनुमान के मुताबिक डीकेएस और आंबेडकर अस्पताल में हर महीने 12 ब्रेनडेड केस आते हैं। सबसे ज्यादा केस डीकेएस अस्पताल में आते हैं क्योंकि यहां न्यूरो ट्रामा है। ऐसे में हेड एंजुरी से जुड़े ज्यादातर केस यहीं पहुंचते हैं। डॉ. आंबेडकर अस्पताल में भी बहुत लोग ब्रेन हैमरेज लेकर पहुंचते हैं। इनमें भी कई ब्रेनडेड हो जाते हैं। आंबेडकर अस्पताल में क्रिटिकल केयर के एचओडी डॉ. ओपी सुंदरानी कहते हैं, एक ब्रेनडेड मरीज 8 जिंदगियां बचा सकता है।

इधर, सोटो में 104 ऐसे लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है जिन्हें ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत है। सोटो के पास फिलहाल कोई डोनर नहीं है। ऐसे में गंभीर परिस्थिति से गुजर रहे मरीज जिंदगी की बाट जोहे बैठे हैं। डॉ. सुंदरानी मानते हैं कि समाज में अभी जागरूकता की कमी है। इसी वजह से लोग ब्रेनडेड हो चुके रिश्तेदार की बॉडी कैडेवर ट्रांसप्लांट के लिए डोनेट करने आगे नहीं आते।

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ब्रेनडेड क्या है?

ब्रेनडेड व्यक्ति का ब्रेन पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। अगर ब्रेन 1% भी काम रहा है, तो उसे कोमा माना जाता है। इसे ब्रेनडेड नहीं कहा जा सकता। ब्रेनडेड को कानूनी रूप से मृत माना जाता है। अगर किसी का ब्रेनडेड हो गया तो डेथ सर्टिफिकेट उसी तारीख का बनेगा जब उसका ब्रेनडेड हुआ था। भले ही व्यक्ति की सांसे कुछ देर तक चलती रहें।

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3 डोनर ऐसे मिले: हेड एंजुरी से 1 तो ब्रेन हैमरेज से 2 ब्रेनडेड

अगस्त 2022 को सोटो का गठन होने के साथ प्रदेश में ब्रेनडेड मरीजों के कैडेवर ट्रांसप्लांट को मंजूरी मिलने लगी। सोटो को पहली डोनर नवंबर में मिली। रायपुर के कबीर नगर में रहने वाली 45 साल की महिला का ब्रेन हैमरेज की वजह से ब्रेनडेड हो गया था। दूसरा डोनर बस्तर से था जो हेड एंजुरी का शिकार हुआ था। तीसरी डोनर एम्स में काम करने वाली 24 साल की नर्सिंग ऑफिसर थी। उन्हें भी ब्रेन हैमरेज था।

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प्रदेश में हर महीने कई व्यक्तियों का ब्रेनडेड हो जाता है। ऐसे मरीजों की पहचान अनिवार्य करने से ब्रेनडेड की शिनाख्त और सही डोनर की पहचान आसान होगी। सरकारी अस्पतालों से इसकी शुरुआत हो सकती है। तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में ये हो भी रहा है। प्रदेश में अभी 104 लोगों को डोनर का इंजतार है। अगर हर महीने एक डोनर भी मिल जाता है तो यह लोगों की जिंदगियां बचाने में बड़ा योगदान साबित होगा।

- डॉ. विनीत जैन, डायरेक्टर, सोटो