
24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस मनाया जाता है। (photo Patrika)
World Schizophrenia Day: मानसिक बीमारियां अक्सर शरीर की बीमारियों से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित होती हैं, क्योंकि उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। सिजोफ्रेनिया भी ऐसी ही एक मानसिक स्थिति है जो व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं को गहराई से प्रभावित करती है। हर साल 24 मई को विश्व सिजोफ्रेनिया जागरुकता दिवसमनाया जाता है ताकि इस बीमारी को लेकर समाज में जागरुकता फैलाई जा सके और पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का वातावरण तैयार हो।
सुमति (बदला हुआ नाम) राजनांदगांव की रहने वाली एक 27 वर्षीय युवती पिछले चार वर्षों से सिजोफ्रेनिया से जूझ रही है। शुरुआती दौर में गांव वालों ने झाड़-फूंक कराई, लेकिन बाद में मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में उसे नियमित इलाज मिला। अब वह सामान्य जीवन जी रही है और ब्यूटी पॉर्लर चला रही है।
क्या है सिजोफ्रेनिया
यह एक गंभीर मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति वास्तविकता की पहचान खो देता है।
मरीजों को अक्सर भ्रम, मतिभ्रम और अवास्तविक विश्वास होते हैं।
यह कोई पागलपन नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है जिसे इलाज से बेहतर किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में स्थिति
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरुकता की कमी है।
ग्रामीण इलाकों में इसे अंधविश्वास या भूत-प्रेत मान लिया जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संया सीमित है और सुविधाएं शहरी क्षेत्रों तक सिमटी हैं।
क्या करें?
सुनें, समझें और साथ दें, मरीज को अकेला न छोड़ें।
डॉक्टरी सलाह लें, मनोचिकित्सक से मिलना शर्म की बात नहीं है।
मिथकों को तोड़े, यह कोई आत्मा का साया नहीं, एक मेडिकल स्थिति है।
Published on:
24 May 2025 11:36 am
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