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होली तिहार म रहस-डंडा नाच के परंपरा

मनखेमन तिहार-बार म उछाह-मंगल मनाय बर नाना रिकिम के उदिम करथें। होरी तिहार ल रंग तिहार कहे जाथय। नवा बछर के आय के पहली मन रंग ले भरे ले बछर भर उछाह बने रहिथे। होरी तिहार ह भगवान किरिस्न ले घलो जुड़े हे। सिरीकिरिस्न ह रासलीला करे रहिस। वोकरे सुरता म रहस नाच नाचे जाथे। होरी तिहार म डंडा नाच घलो नाचे जाथे।

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होली तिहार म रहस-डंडा नाच के परंपरा

होली तिहार म रहस-डंडा नाच के परंपरा

छत्तीसगढ़ म डंडा नाच छेरछेरा अउ दूसर तिहारमन म घला नाचे जाथे। रहस नाच ह होरी तिहार के पहिली ले सुरू हो जाथे। सहर म गांव के रहस मंडली ह जाके होरी तिहार के आय के रंग भर देथे। राधा-किस्न के रूप म सजे झांझ, मंजीरा, ढोल, टासक, नंगारा, डमरू बजावत फागुन गीत म नाचथे त होरी तिहार के उछाह दसो गुना बाढ़ जाथे।
डंडा नाच मा कम से कम तीन जोड़ी नचइया होथे। वोकर ले आगू कतको जादा हो सकत हे। नचइयामन के दूनों हाथ, नइते एक हाथ म डंडा होथे।
आजकल के डंडा नचइयामन रंग- बिरंग के सजे-धजे अउ साज-बाज म होथे। गाना अउ बाजा के संग एक-दूसर के डंडा ल मारत गोल-गोल घूम के नाचथें। जउन-जउन घर के मोहाटी मा नाचथें उंकर घर के एक मनखे ह नचइया-गवइया अउ बजइयामन के ऊपर गुलाल लगाथे अउ रंग डारथे। पाछू उंकर बिदा धान-चाउर नइते रुपया-पइसा दे के करथें। कतको घर रोटी-पीठा घलो खाय बर मिल जाथे।
दिनभर गांव-गली म घूमत ये टोली संझौती के बेरा गांव के चउक म फेर सकलाथे जिहां गांवभर के दाई-माई, बेटी-बहिनी, लइका-सियान सकलाय रहिथें। उहां फेर झूम-झूम के नाचथे- गाथें।
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होरी के रंग
‘फाग के संग’
छत्तीसगढ़ के लोक संस्करीति म इहां गाए जाने वाला सुआ, करमा, ददरिया, डंडा जइसन कतकोन लोकगीत के बीच बसंत पंचमी ले लेके होली तक गाए जाने वाला फा गीत ह अपन अलगे महत्तम राखथे। सरसों के पींवरा-पींवरा फूल, आमा के मउर, अंगरा कस दहकत टेसू, सबो मिलके जब भुइंया के सिंगार करथें अउ अमरइया म कोइली कुहके लागथे ओही बखत मांदर, झांझ, नगाड़ा, टिमकी अउ मंजीरा के सुग्घर धुन के संग जब फाग गीत गाए जाथे, त ओ गीत ह सबो मनखेमन के हिरदय म उछाह भर देथे। हमर परंपरा हावय के कोनो बढिय़ा काम ल करे के पहिली गनेस भगवान के पूजा करे जाथे। फाग गीत म सबले पहिली गनेस भगवान ल बिनती करे जाथे।
चल हां गजानन पहिली
बनती तोला हे...।
अरे पहिली बिनती तोला हे गजानन।
पहिली बिनती तोला हे।
गौरी के, गौरी, गौरी के लाल गजानन
पहिली बिनती तोला हे...।
होली के रकम-रकम के रंग असन फाग गीत के घलो अड़बड़ अकन रंग हे। अइसे माने जाथे के राधा बिन होली सुरू नइ होय। तेकरे पाय के राधा ल होली खेले बर बुलउवा देहे जाथे।
दे दे बुलउवा राधे को।
राधा बिन होरी न होय।
दे दे बुलउवा राधे को...।
राधा-किसन के परेम ल जनमानस ह फाग गीत म परगट करथे। किसन के बियोग म राधा के जउन हाल होथे ओला फाग गीत म सुग्घर ढंग ले ढाले गए हे।
राधा रोवय मधुबन म।
अकेली तन राधा रोवय मधुबन म।
हरि होगे, हरि होगे,
हरि होगे अंतरधियान।
अकेली तन राधा रोवय
मधुबन म ...।
भोलेनाथ ल सुरता करत लोगन गाथे।
तैं कइसे डमरू बजा दिए भोलेनाथ...
तैं कइसे डमरू बजा दिए ना।
भोले के माथे म तिलक चंदरमा।
जटा ले गंगा बहा दिए भोलेनाथ...।
राधा-किसन ले लेके गनेस, संकर, हनुमान अउ कतकोन देवी-देवता ले जुड़े फाग ल अध्यात्मिक स्वरूप देवइया गीत के संग अलग-अलग रस के फाग गीत सुने ल मिलथे। सिंगार अउ बीर रस के सुग्घर रूप फाग गीत म मिलथे।
उदल बांधे तलवार,
उदल बांधे तलवार।
एक रानी सोनवा के कारन रे।
काकर डेरा मधुबन म,
काकर कदली कछार...।
काकर डेरा मइहर म,
उदल बांधे तलवार।
आल्हा के डेरा मधुबन म
उदल कदली कछार।
सोनवा के डेरा मइहर म,
उदल बांधे तलवार...।
फाग गीत म दहकी, मल्लाही, तीन ताल, चौताल, कबीर गाए जाथे। गीत के ए सैलीमन गीत गाने वाला अउ बाजा के तेज मझोलन या धीरे सुरताल के अधार म बने हे। होली म अलग-अलग बिसय के कबीर सुने बर मिलथे। कबीर के उलटबांसी के नमूना घलो मिल जाथे।
तहुं जहुंरिया, महुं जहुंरिया,
कि बद लीन गोंदाफूल...।
साठ-गांठ के बेनी गंथाए,
खोंचे कमल के फूल।
दार-भात भूखन मर गे,
पानी मरिस पियास...।
चूल्हा बिचारा लकड़ी म जरगे, खटिया मरिस ऊंघास।
जिनगी म रोज काम आने वाला चीजमन के संग समाज म बगरे नसा अउ बुराईमन ल परगट करत फी गीत म ए समे के सबले बड़े बुराई दारू ह घलो जघा बना डारे हे।
अरे वाह रे दारू, तोला कोन बना हे।
तोला पी के सरग दिख जाय...।
मनखे के जिनगी के अंग-अंग ल छुअत फाग गीतमन जिनगी म मधुरस घोरत होली तिहार के उछाह अउ मजा ल कई गुना बढ़ा देथें। होली तिहार म बनने वाला अरसा, डेहरौरी,भजिया अउ कतको किसम के पकवान के संग फाग गीत ह अड़बड़ आनंद देथे। होली के रंग म सबोझन कइसे बूड़ जाथें ओला ए गीत म बड़ सुग्घर ढंग ले बता गे हे।
रंग मा, रंग मा, रंग मा रे, रंगे हावय सबो एक रंग मा।
स र र रा अ र र र रा नाचय होली के हुड़दंग मा।
होली हे, होली हे, होली हे।
रंग मा।
डोकरी-डोकरा, छोकरी-छोकरा, रंगे हावय सबो एक रंग मा रे।
खाके मतौना माते हांवय, कोनो दारू कोनो भंग मा रे।
रंग मा।
- कल्पना कौशिक द्वारा श्री तुकाराम कौशिक
वार्ड क्रमांक.10एनगर पंचायत़पोस्ट.
सरगांवएतहऽ.पथरिया एजिला .मुंगेली