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डेढ़ वर्ष से बीमा व पीएफ राशि के लिए भटक रही महिला

नगर समीप ग्राम बाना की महिला अश्वनी बाई यादव जिसके पति स्व. हेमंत यादव जो खरोरा तहसील में चेनमैन के पद पर कार्यरत थे। जिसकी मृत्यु लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। जिसकी बीमा राशि व पीएफ की रकम के लिए महिला विगत डेढ़ वर्ष से इधर-उधर दफ्तरों के चक्कर काट रही है, पर अब तक बीमा व पीएफ राशि की रकम नहीं मिली है।

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डेढ़ वर्ष से बीमा व पीएफ राशि के लिए भटक रही महिला

डेढ़ वर्ष से बीमा व पीएफ राशि के लिए भटक रही महिला

खरोरा। समीपस्थ ग्राम बाना की महिला अश्वनी बाई यादव पति की मौत के बाद उसकी बीमा व पीएफ राशि के लिए डेढ़ वर्ष से दफ्तर-दर-दफ्तर भटक रही है। थक-हार कर उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर अपनी व्यथा सुनाई। इस पर कलेक्टर सौरभ कुमार ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करते हुए नियमानुसार देय राशि शीघ्र दिलाने के सख्त निर्देश दिए।
परिवार के कमाऊ सदस्य का चला जाना भावनात्मक ही नहीं, आर्थिक स्थिति पर भी एक बहुत बड़ा झटका हैं। घर के मुख्य सदस्य की अचानक अकाल मृत्यु का हो जाना परिवार के लिए सबसे बढ़ी क्षति तो होती ही है, साथ ही आर्थिक स्थिति भी डगमगा जाती है। सरकारी नौकरी हो अन्य नौकरीपेशा, लोगों के लिए बीमा और पीएफ हमेशा से ही बचत और निवेश के कुछ सबसे बेहतर माध्यमों में से एक रहा है। इसके अलावा पीएफ खाते के तहत नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन की सुविधा जैसे कई और फायदे भी मिलते हैं, ताकि रिटायरमेंट के बाद भी उनके खर्चे मैनेज होते रहें। साथ ही यदि किसी दुर्घटना या आकस्मिक वजहों से खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो इस दशा में उसकी पत्नी या पति और बच्चों को भी बीमा सहित पीएफ की सुविधा का लाभ दिया जाता है।
नगर समीप ग्राम बाना की महिला अश्वनी बाई यादव जिसके पति स्व. हेमंत यादव जो खरोरा तहसील में चेनमैन के पद पर कार्यरत थे। जिसकी मृत्यु लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। जिसकी बीमा राशि व पीएफ की रकम के लिए महिला विगत डेढ़ वर्ष से इधर-उधर दफ्तरों के चक्कर काट रही है, पर अब तक बीमा व पीएफ राशि की रकम नहीं मिली है। थक हारकर महिला कलेक्टर जनदर्शन में पहुंची। कलेक्टर सौरभ कुमार ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करते हुए नियमानुसार देय राशि शीघ्र दिलाने के सख्त निर्देश दिए।
बीमा व पीएफ मिलने सुधर सकती है स्थिति
समय पर अगर बीमा और पीएफ की राशि मिलेगी तो जरूर परिवार को थोड़ी मदद मिलेगी। सरकारी दफ्तर में व्यवस्थित व्यवस्था की जाती तो जरूरतमंदों को भटकना नहीं पड़ेगा।