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आयुष्मान कार्ड: निजी अस्पतालों में 167 प्रकार के नि:शुल्क इलाज सहित सिजेरियन डिलीवरी बंद

इस योजना के माध्यम से अब तक निजी अस्पतालों में इन्हें इलाज मिल जाता था, लेकिन सरकार ने क्रमश: मलेरिया, मोतियाबिंद, उल्टी-दस्त, एचआईवी, टीबी, नसबंदी, गैंगरिन समेत 166 प्रकार के नि:शुल्क इलाज बंद कर दिए थे। अब इसमें इलाजा करते हुए सिजेरियन डिलीवरी को भी शामिल कर दिया गया है।

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बिलासपुर। प्रदेश में ऐेसे लाखों जरूरतमंद हैं, जिनकी किसी तरह रोजी-रोटी चल रही है। ऐसे में बीमार पड़ गए तो उनके पास इलाज तक के लिए पैसे नहीं होते। लिहाजा सरकार ने इनके लिए आयुष्मान भारत योजना लागू की थी।

इस योजना के माध्यम से अब तक निजी अस्पतालों में इन्हें इलाज मिल जाता था, लेकिन सरकार ने क्रमश: मलेरिया, मोतियाबिंद, उल्टी-दस्त, एचआईवी, टीबी, नसबंदी, गैंगरिन समेत 166 प्रकार के नि:शुल्क इलाज बंद कर दिए थे। अब इसमें इलाजा करते हुए सिजेरियन डिलीवरी को भी शामिल कर दिया गया है। लिहाजा अब 167 प्रकार का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं होगा। सरकार के इस निर्णय से लोगों को परेशानी को सामना करना पड़ेगा। बतादें कि आयुष्मान कार्ड योजना जब शुरू हुई तो उस समय 2300 प्रकार की बीमारियों का निशुल्क इलाज शामिल किया गया था।

इसके बाद क्रमश: इलाजों को हटाया जाने लगा। अब इसमें से 167 इलाजों को निजी अस्पतालों से हटा दिया गया है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों पर पड़ेगा। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में इस प्रकार के इलाज सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में होना मुश्किल है। लिहाजा मरीज के पास अब जिला अस्पताल और सिम्स मेडिकल कालेज के अलावा निजी अस्पताल में अधिक फीस देकर इलाज कराना मात्र विकल्प रह गया है।

आम मरीजों को होगी परेशानी...
सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज की बेहतर व्यवस्था न होने से आयुष्मान योजना के तहत मरीज निजी अस्पतालें में इलाज कराते हैं। बीपीएल परिवार के मरीजों को 5 लाख, एपीएल कार्डधारियों को 50 हजार तक के इलाज की सुविधा मिलती है। ज्यादातर महिलाएं सिजेरियन डिलिवरी निजी अस्पतालों में ही कराती हैं। इधर 14 अगस्त से निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारियों की सिजेरियन डिलीवरी बंद करने का शासन से आदेश आ गया। शासन ने इसके पहले भी दांत, आंख सहित 166 प्रकार के इलाज का पैकेज हटा दिया था। बतादें कि आयुष्मान कार्ड के जरिए जिले के 62 निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती थी।

निजी अस्पतालों में बढ़ेगी मनमानी...
डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल के पीछे 100 बेड का मातृ एवं शिशु अस्पताल बनाया गया है। दावा किया गया था, यहां डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं का प्राथमिकता से इलाज होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ज्यादातर मरीजों को यहां से निजी अस्पताल भेजा जा रहा है। इस संबंध में सीएमएचओ को कई शिकायतें भी मिल चुकी हैं। इसी वजह महिलाएं आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निजी अस्पतालों में डिलीवरी कराती थीं। अब जब कि निजी अस्पतालों में इस योजना के माध्यम से लाभ नहीं मिलेगा, तो वहां मनमानी बढ़ जाएगी। मनमाना शुल्क लेकर इलाज किया जाएगा। बतादें कि सिजेरियन प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में 35 से 50 हजार तक की फीस ली जाती है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 16 हजार रुपए प्रति केस दिए जाते थे। लोग इसके ऊपर के खर्च उठा लिया करते थे।

ये सुविधाएं बंद..
अपेंडिक्स, मलेरिया, हार्निया, पाइल्स, हाइड्रोसील, पुरुष नसबंदी, डिसेंट्री, एचआईवी विध कम्प्लीकेशन, बच्चादानी ऑपरेशन, हांथ-पांव की सर्जरी, मोतियाबिंद पट्टा चढ़ाना, गांठ, इंफेक्शन, आतों का बुखार सहित अन्य प्रकार के इलाज आयुष्मान कार्ड के जरिए अब निजी की जगह केवल सरकारी अस्पतालों में ही होंगे।