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लाटा महाराज ने कहा- लोग अपनी परंपराएं छोड़ रहे, मर्यादाएं तोड़ रहे, यही क्लेश का सबसे बड़ा कारण

विवाह जैसे समारोह में मदिरा का सेवन कर रहे हैं। आज विवाह संबंध टूट रहे हैं। आजकल जन्म दिन पर केक काटे जाते हैं। दीपक को बुझाने की परंपरा चल पड़ी है। ये कभी भी हमारी परंपराएं नहीं रही।

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लाटा महाराज ने कहा- लोग अपनी परंपराएं छोड़ रहे, मर्यादाएं तोड़ रहे, यही क्लेश का सबसे बड़ा कारण

देवेंद्र नगर में चल रही श्रीराम कथा करते हुए संत शंभूशरण लाटा महाराज।

रायपुर. भगवान की हर लीला और कथा से मनुष्य को जीवन में कैसा व्यवहार, आचरण करना चाहिए, यह सीख मिलती है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज समाज में तेजी से गिरावट आती जा रही है। लोग अपनी परंपराएं छोड़ रहे, मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। यही समाज और व्यक्ति में क्लेश का बड़ा कारण है। देवेंद्र नगर में चल रही श्रीराम कथा करते हुए ये बातें संत शंभूशरण लाटा महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि विवाह जैसे समारोह में मदिरा का सेवन कर रहे हैं। आज विवाह संबंध टूट रहे हैं। आजकल जन्म दिन पर केक काटे जाते हैं। दीपक को बुझाने की परंपरा चल पड़ी है। ये कभी भी हमारी परंपराएं नहीं रही। दीपक बुझाना यानी स्वयं के लिए अंधेर का निर्माण करना हैं। दीपक तो अच्छे कार्यों के लिए प्रज्वलित किए जाते हैं। पाश्चात्य परंपराओं को अपनाने से जीवन खुशहाल होने वाला नहीं है।
विवाह रस्म नहीं, संस्कार है
सीता स्वयंवर प्रसंग का वर्णन करते हुए लाटा महाराज ने कहा कि विवाह बंधन रस्म नहीं, बल्कि यह संस्कार रहै। अपनी वाणी पर नियंत्रण व संयमित रखना चाहिए। क्रोधित परशुराम से जो बातें लक्ष्मण ने कहीं वही बातें लक्ष्मण ने भी कहीं लेकिन दोनों के कहने में अंतर है। वाणी में यदि मिठास हो तो कभी क्लेश होगा ही नहीं। भगवान श्रीराम की वाणी और उनके व्यवहार से परशुराम प्रसंन्न हो गए, जो क्रोध से आग-बबूला हो रहे थे, वे समझ गए और अपनी गलती को अज्ञानता में हुई गलती स्वीकार किया। शंभूशरण लाटा महाराज ने कहा कि हमारी संस्कृति में वृद्ध आश्रम की नहीं है गृहस्थ जीवन में ही बड़े बुजर्गों से सलाह लेते थे और कार्य करते हैं लेकिन आज घर में माता.पिता वृद्ध नहीं चाहिये उन्हें वृद्ध आश्रम में भेजा जा रहा है। जिस घर में बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता वह घर.घर नहीं रहता। उन्होंने कहा कि धर्म और विज्ञान में जो भेद करते हैं वे नहीं जानते कि धर्म ही हमारा विज्ञान है। पहले मंत्र योग था और अब यंत्र योग है। विज्ञान की तरक्की को नकारा नहीं जा सकता विज्ञान की तरक्की के साथ ह्रास भी हो रहा है। विज्ञान की तरक्की से मनुष्य की शक्ति ओर उसकी ऊर्जा समाप्त होते जा रही है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को शक्ति उसके पूर्व में किए गए पुण्य कार्योसे प्राप्त होती है लेकिन भक्ति मनुष्य को इसी जन्म से मिलती है।
जीना सिखाती है रामकथा
नया हनुमान मंदिर बूढ़ापारा में श्रीमद् भगवत कथा सुनाते हुए चित्रकूट के आचार्य सुरेश प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि जब तक राम का चरित्र जीवन मे नही आएगा, तब तक कृष्ण लीला सुनने का लाभ नहीं हो सकता। हमारे जीवन की प्रयोग शाला है रामकथा, जिसका अनुकरण करना चाहिए। श्री रामचरित्र अनुकणीय है, श्रीकृष्ण चरित्र अनुभव करने की प्रेरणा देता है। कथा का आयोजन बूढ़ापारा ढिंग़े परिवार द्वारा किया जा रहा है।