
सरकारी स्कूल की दीवारों में की गई चित्रकारी। शाला के प्रधान पाठक सीके महिलांगे।
रायपुर. chhattisgarh education news : अचकन, बचकन पढ़ेगा बचपन...बेटी ला घलो पढ़ाके देख..जैसे कई खूबसूरत नारे स्कूल की दीवारों पर खिलखिला रहे हैं। ये नारे बच्चों को चिढ़ाते नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई के रास्ते खोलते हैं। पालकों का बेटियों के प्रति नजरिया बदलते हैं।
एक सरकारी स्कूल की दीवारों को इस तरह से रंगरोगन करने का काम किया है शासकीय प्राथमिक शाला नवगंवा बिलासपुर के प्रधानपाठक सीके महिलांगे ने। स्कूल तक बच्चों को लाने के लिए तरह-तरह के नवाचार करने वाले सीके महिलांगे ने यह काम हाल ही में सरकार से स्कूल की मरम्मत व रंगाई-पुताई के लिए मिली राशि से किया है। वे खुद खड़े होकर पढ़ाई से संबंधित नारे खुद गढ़े और उसे अपनी समझ से दीवारों पर उतरवाया।
पत्रिका डॉटकाम से बातचीत में प्रधानपाठक सीके महिलांगे ने कहा कि उनका सपना है कि छत्तीसगढ़ का हर बेटा-बेटी स्कूल आए और शिक्षित होकर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे। सीके महिलांगे ने बताया कि कोरोना काल में भी उन्होंने नवागांव की गलियों और मोहल्लों में कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराई और बच्चों को सरकारी राशन भी पहुंचाया। वे बताते हैं कि उनके व्यवहार के कारण ही पालक हर समय हर जरूरी मदद करने के लिए तैयार रहते हैं।
प्रधानपाठक महिलांगे का कहना है कि शासकीय प्राथमिक शाला नवगवां में बच्चों के लिए आकर्षक और सुंदर प्रिंट रिच इस तरह से तैयार किया गया है कि बच्चे खेल -खेल में पढऩा - लिखना बोलना देखकर अनुसरण करें। रोचक ढंग से पढ़ाई करने के लिए कार्टून के माध्यम से प्रेरित करना और स्वच्छता का संदेश देने के लिए मोटू पतलू छोटा भीम के द्वारा साफ सफाई और स्वच्छता का संदेश देते हुए दीवारों पर चित्र बनाए गए हैं। यह सब बच्चों को रोचक ढंग से खेल खेल में समझाने का एक प्रयास किया गया है। शाला के प्रधान पाठक सीके महिलांगे का कहना है कि उनके मार्गदर्शन में बहुत ही सुंदर और आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है, ऐसे में सभी ग्रामवासी और स्कूल के बच्चों से भी स्वच्छता और साफ सुथरा रखने की अपील की गई है।।
Published on:
09 Dec 2022 12:31 pm
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