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एम्स : 60 डॉक्टर व स्टाफ क्वारंटाइन, 21 दिन बाद मिलेंगे परिवार से

आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टरों की बदली ड्यूटी: सभी की स्क्रीनिंग, लक्षण दिखने पर लिया जाएगा सैंपल

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एम्स : 60 डॉक्टर व स्टाफ क्वारंटाइन, 21 दिन बाद मिलेंगे परिवार से

एम्स : 60 डॉक्टर व स्टाफ क्वारंटाइन, 21 दिन बाद मिलेंगे परिवार से

रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के आयुष बिल्डिंग में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए बने आइसोलेशन वार्ड में तैनात लगभग 60 डॉक्टरों व स्टॉफ को 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा गया है। ये लोग अब 21 दिन बाद ही अपने परिजनों से मिले पाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर कुछ डॉक्टर व स्टॉफ को टांटीबंध स्थित एक निजी होटल में रखा गया है। वहीं, कुछ को हॉस्टल में क्वारंटाइन किया गया है। इनकी जगह दूसरे डॉक्टर व स्टॉफ तैनात किए गए हैं, जिन्हें 7 दिन बाद इनको क्वारंटाइन में रखा जाएगा। एम्स प्रबंधन के अनुसार सभी डॉक्टरों की स्क्रीनिंग और उनके सामानों को सेनिटाइज किया गया है। अब तक एम्स में 9 मरीजों को भर्ती किया जा चुका है, जिसमें से 7 ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। एम्स के आयुष बिल्डिंग में आयुष बिल्डिंग में 4 फैकल्टी (पीडियाट्रिक, पल्मोनरी मेडिसिन, ईएनटी, जनरल मेडिसिन) के डॉक्टर, 9 एसआर (सीनियर रेजीडेंट), 13 जेआर मिलाकर कुल 60 स्टॉफ और टेक्निशियन तैनात रहते हैं। डॉक्टर व स्टॉफ की ड्यटी दो शिफ्ट में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे और रात 9 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक रहती है।

8 दिन में दिखते हैं लक्षण

नोडल अधिकारी डॉ. अजय बेहरा ने बताया कि कोरोना वार्ड में रहकर आ रहे हैं डॉक्टर व स्टॉफ को इसलिए क्वारंटाइन किया जा रहा है क्योकि, कोरोना वायरस के लक्षण तत्काल नहीं दिखते हैं। इसमें 6 से 8 दिन का समय लगता है। 7 दिन बाद सभी का टेस्ट होगा। रिपोर्ट निगेटिव आई तो 3 दिन बाद दूसरा टेस्ट होगा। 14 दिन सब कुछ ठीक रहा, तो सभी को छुट्टी दे दी जाएगी।
14 दिन कमरे से नहीं निकलेंगे
क्वारंटाइन के दौरान डॉक्टर व स्टॉफ 14 दिनों तक कमरें से बाहर नहीं निकल पाएंगे। इन्हें भोजन के साथ सारी दैनिक उपयोग की सामग्री कमरें में ही उपलब्ध कराई जाएगी। 14 दिन बाद इनकी कोरोना जांच की जाएगी। 7 दिन ड्यूटी और 14 दिन क्वारंटाइन के मिलाकर 21 दिन बाद जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आएगी, वही घर जा पाएंगे। पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाएगा।
एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. नितिम एम नागरकर का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मरीज के साथ रहने से संक्रमण का खतरा रहता है हालांकि, वह मास्क, ग्लब्स व पीपीई कीट पहने रहते हैं।