
रायपुर के होटल सयाजी में पत्रिका से बात करते दिलीप कौशिक।
ताबीर हुसैन@ रायपुर. हर इंसान का एक सपना होता है जिसे वह अपने जीवन में हासिल करना चाहता है। सवाल यह कि वह उस सपने को जिंदा रख पाता है या नहीं। आज एक ऐसे टीचर से रूबरू कराएंगे जो सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। वे कोई साहित्य या कला की क्लास नहीं बल्कि गणित पढ़ा रहे हैं। ऐसे में उनसे प्यार-मोहब्बत की बजाय सूत्र और समीकरण पर बात होनी चाहिए। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वे छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी की फिल्में लिखने लगे हैं। कर्रा (दर्रीघाट) मस्तुरी जिला बिलासपुर निवासी दिलीप कौशिक एक फिल्म के मुहूर्त में रायपुर आए थे। वे पूर्व माध्यमिक शाला लिमतरा (मस्तुरी) का प्रभार देख रहे हैं। पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने जर्नी शेयर की।
स्कूली जीवन में लिखी कविताएं
स्कूली जीवन में कविता लिखा करता था। पत्र-पत्रिकाओं में छपे भी। इसके बाद शुरू हुआ उपन्यास का दौर। दोस्तों का ग्रुप था। हम आपस में किताब बदल-बदलकर पढ़ा करते थे। उसी दौरान नौकरी भी लग गई लेकिन जो पढ़ा था वह मेरी कल्पना शक्ति को बढ़ा रहा था। इसलिए जब भी टाइम मिलता मैं कुछ न कुछ जरूर लिखता। इससे लिखने की प्रैक्टिस भी बनी रही। आज वही अभ्यास मेरे काम आ रहा है।
ससुराल फिल्म से शुरुआत
प्रभास निर्देशित करण खान और सोनाली सहारे अभिनीत ससुराल से मेरी शुुरुआत हुई। इसमें मैंने पटकथा, संवाद और गीत लिखे। प्रोड्यूसर सागर केशरवानी को एक अच्छी स्क्रिप्ट की तलाश थी। किसी ने उन्हें मेरे बारे में बताया। हमारी मुलाकात हुई और मिलने के बाद उन्होंने उस फिल्म का प्रोजेक्ट मुझे दिया।
ऐसे मिली भोजपुरी फिल्म
तीन साल पहले इश्क कयामत के प्रोड्यूसर अमित कुमार ने कॉल किया था। इसके बाद बिलासपुर हमारी मुलाकात हुई। वे चाहते थे कि एक ऐसी कहानी लिखूं जिसे छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी दोनों में फिल्म बनाई जा सके। मेरी स्टोरी उन्हें पसंद भी आई लेकिन कोरोना के चलते शेड्यूल तय नहीं हो पाया था। जब सब न्यू नॉर्मल हुआ तो इसका मुहूर्त भी हो गया।
पैसे पर ध्यान नहीं दिया
मैंने कभी किसी को पैसे के लिए नहीं बोला। लेखन मेरा जुनून है इसलिए शुरुआती दिनों में मेरा फोकस था कि मेरा लिखा हुआ परदे में आ जाए। वैसे भी छालीवुड में लेखक को बहुत ज्यादा पैसे मिलते भी नहीं हैं। स्क्रिप्ट में सुधार आखिरी तक संभव है क्योंकि सिचुएशन के मुताबिक चीजें बदलती हैं। लेकिन इतना जरूर है कि स्क्रिप्ट से छेड़छाड़ जैसी वाली कोई बात नहीं रहती। आपको स्टोरी लाइन के मुताबिक बात कहने की पूरी आजादी मिलती है।
पत्नी के सहयोग से संभव
लेखन के क्षेत्र में मैं पत्नी क वजह से ही आगे बढ़ सका। इस काम में माइंड का रिलेक्स होना बहुत जरूरी होता है। पत्नी ने घर के साथ-साथ मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां ले ली। सबसे खास बात यह कि मैं बॉयोलॉजिकल नींद लेता हूं यानी रात 10 से सुबह 5 बजे तक। आमतौर पर मैं स्कूल से आने के बाद ही लिखता हूं।
आने वाली फिल्में
बितरिया बाबा के अमृत माटी, गवन, प्यार हुआ चोरी-चोरी, सनम तोर कसम, इश्क कयामत
Published on:
30 Mar 2022 11:11 pm
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