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तरीघाट, रीवा और जमराव में दफन प्राचीन सभ्यता के अब खुलेंगे राज

- पुरातात्विक खुदाई के लिए फिर मिला लाइसेंस - रीवा और जमराव में पिछले साल पहली बार हुई थी खुदाई

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तरीघाट, रीवा और जमराव में दफन प्राचीन सभ्यता के अब खुलेंगे राज

तरीघाट, रीवा और जमराव में दफन प्राचीन सभ्यता के अब खुलेंगे राज

रायपुर.भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एसीआई) ने छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग को तीन स्थलों (साइट) की खुदाई का लाइसेंस फिर से जारी कर दिया है। इनमें तरीघाट, रीवा व जमराव शामिल हैं। ये तीनों पुराने ही स्थल हैं, लेकिन यहां जमीन के अंदर हजारों वर्ष पुराना इतिहास मिलने की अपार संभावना है। यही वजह है कि विभाग यहां फिर से खुदाई का काम शुरू करने जा रहा है।

'पत्रिकाÓ से बातचीत में विभाग के उप संचालक एवं पुरातत्ववेत्ता जेआर भगत ने कहा कि तीनों ही स्थल की खुदाई के लिए जितना समय पूर्व में मिला था, उतने समय पर हम सबने बहुत कुछ हासिल किया। मगर, आगे होने वाली खुदाई छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास को और स्पष्ट कर देगा। गौरतलब है कि खारुन नदी के किनारे बसे गांव पुरातात्विक महत्व से काफी महत्वपूर्ण हैं। जिनमें कौही, तरीघाट, केसरा, जमराव, उफरा, पहंदा, बठेना, असोगा, आगेसरा, गुढिय़ारी, झीट शामिल हैं।

तरीघाट-

स्थान- पाटन के पास स्थित गांव

इतिहास- तीन हजार साल पुराना इतिहास-

- तरीघाट में वर्ष 2012-13 में छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने खुदाई की थी। यहां 3 हजार साल पुराना इतिहास मिला। महत्वपूर्ण उपलब्धि टेराकोटा के जिराफ को माना। जिराफ के चित्र भीमबेठका की गुफा में और ओडिशा स्थित कोर्णाक के सूर्य मंदिर में भी अंकित है। यहां इंडो ग्रीक व इंडो सिथियन सिक्के भी मिले। आंकलन किया गया है कि तरीघाट एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र रहा होगा।पुरातत्ववेत्ता जेआर भगत मानते हैं कि इस जमीन में अभी बहुत कुछ दफन है।

रीवा-

स्थान- आरंग के समीप ग्राम रीवा

इतिहास- 1800 साल पुराना-

- आरंग के समीप ग्राम रीवा में खुदाई के दौरान 18 सौ वर्ष पुराने ईटें, सोने-चांदी के सिक्के, मणिकणिकाएं भी मिली थीं। छठवीं सदी ईसवी में महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथा व्यापारिक स्थल होने का अनुमान लगाया गया। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया कि यहां सोने-चांदी के सिक्के से लेकर मणिकणिकाएं बनाने का काम होता रहा होगा। उत्खनन के दौरान पद्मश्री अरूण शर्मा ने दावा किया था कि 40 टीले मिले हैं, यानी यह एक बड़ा संपन्न शहर था, जो बौध स्तूप की तरह हैं।

जमराव-

स्थान- रायपुर के पास ग्राम जमराव

इतिहास- दो हजार साल पुराना-

- जमराव गांव खारुन नदी के किनारे बसा हुआ है। 2014-15 में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने जमराव के टीलों की रिपोर्ट तैयार की थी। यह एेतिहासिक महत्व का बताया गया था। पिछले वर्ष यहां खुदाई शुरू हुई। यहां कुषाण कालीन सिक्के, मनके व मूर्तियां मिलीं। अनुमान लगाया गया है कि यह स्थान 2 हजार वर्ष पुराना है।