
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Photo Patrika)
AIIMS MBBS Fees: एम्स में एमबीबीएस कोर्स के साढ़े चार साल की ट्यूशन फीस महज 1350 रुपए है। सालाना फीस की बात करें तो 300 रुपए पड़ रहा है। यही कारण है कि एम्स में एडमिशन के लिए मारामारी रहती है। नीट यूजी में 720 में 650 या इससे अधिक स्कोर लाने पर प्रवेश होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि 2024 में 695 स्कोर वालों को भी एडमिशन नहीं मिला था। तब ऑल इंडिया स्तर पर 720 में 720 स्कोर लाने वाले 67 छात्र थे। बाद में री-नीट होने के बाद इनकी संख्या घटकर 12 रह गई थी।
देश में एम्स व पीजीआई चंडीगढ़ में कम फीस पर एमबीबीएस व एमडी-एमएस कोर्स की पढ़ाई हो रही है। यहां प्रवेश के लिए नीट यूजी क्वालीफाई करना अनिवार्य है। एडमिशन मेरिट के अनुसार होता है। केंद्रीय संस्थान होने के कारण यहां फीस सामान्य रखी गई है। सभी मद मिलाकर साढ़े 4 साल की फीस 5,856 रुपए है। यानी एक साल की फीस 1301.33 रुपए है। इसमें हॉस्टल फीस से लेकर जिम, लैब व मेस सिक्योरिटी के अलावा कॉशन मनी शामिल है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सालाना 40 हजार ट्यूशन फीस ली जा रही है। जबकि निजी कॉलेजों में साढ़े 7 से 8.01 लाख रुपए ट्यूशन फीस है। सभी मद मिलाकर साढ़े 4 साल की फीस 65 से 70 लाख रुपए है। इस तरह सरकारी व निजी कॉलेजों की तुलना में एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई कई गुना सस्ती है। नीट यूजी 21 जून को है। जुलाई अंत तक रिजल्ट आ सकता है। इसके बाद छात्र रैंक व स्कोर के अनुसार ये देखेंगे कि उनका एडमिशन एम्स में हो सकता है या नहीं।
एम्स रायपुर में एमबीबीएस की कुल 125 सीटें हैं। यहां देशभर के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदेश के 10 सरकारी व 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 2330 सीटें हैं। केंद्र सरकार के अनुदान से चलने वाले एम्स में क्वालिटी एजुकेशन पर जोर दिया जाता है। इस साल प्रदेश में कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा व कुनकुरी में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव था, लेकिन एनएमसी ने आवेदन ही रिजेक्ट कर दिया है। यानी अब इन कॉलेजों को मान्यता नहीं मिल पाएगी। इससे प्रदेश को एमबीबीएस की 250 सीटों का नुकसान हुआ है। चिकित्सा शिक्षा विभाग व कॉलेज से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही के कारण आवेदन रिजेक्ट हुए हैं।
एम्स रायपुर को दुनिया के बेस्ट अस्पतालों में 39वां नंबर मिला है। देश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी अस्पतालों में 6वां व नए एम्स में पहला स्थान मिलने का दावा प्रबंधन का है। न्यूज वीक की वर्ल्ड्स बेस्ट हॉस्पिटल्स इन इंडिया 2026 की सूची में ये रैंक आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह रैंकिंग मरीजों की बेहतर देखभाल, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में तेजी के कारण मिली है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता अस्पताल की गुणवत्ता, विशेषज्ञों की सिफारिश, मरीजों के अनुभव तथा पेशेंट रिपोर्टेड आउटकम मीजर जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर दी गई है। पिछले दो वर्षों में संस्थान ने विभिन्न सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं, अधोसंरचना विकास, अनुसंधान गतिविधियों और आधुनिक क्लीनिकल सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति की है।
कॉलेज फीस स्कोर जरूरी
एम्स 300 650 से ऊपर
सरकारी कॉलेज 40 हजार 600
निजी कॉलेज 7.50-8.01 लाख 450
चेयरमैन बालाजी मेडिकल कॉलेज डॉ. देवेंद्र नायक,ने कहा
केंद्रीय संस्थान होने के कारण एम्स की फीस कम है। देश के विभिन्न राज्यों की तुलना करें तो छत्तीसगढ़ में निजी कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस सबसे कम है। यही कारण है कि एक-एक सीट में एडमिशन के लिए आखिरी राउंड तक मारा-मारी रहती है। कुछ लोग सीधे प्रवेश लेना चाहते हैं। प्रवेश नीट यूजी के मेरिट के अनुसार ही होता है। राजस्थान व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में निजी कॉलेजों की फीस एक करोड़ रुपए से ज्यादा है।
डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज
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Published on:
13 Jun 2026 03:24 pm
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