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AIIMS Raipur: रायपुर एम्स में बड़ा खुलासा, छात्र का खुद के ही एचओडी ने ले लिया इंटरव्यू, दे दिए 65 नंबर

Raipur News: रायपुर एम्स में एक अनोखा मामला सामने आया है। एम्स में पढ़ रहे छात्र का खुद के ही एचओडी ने इंटरव्यू ले लिया।

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AIIMS Raipur

छात्र का खुद के ही एचओडी ने ले लिया इंटरव्यू (Photo AI)

AIIMS Raipur: रायपुर एम्स में बड़ा खुलासा, छात्र का खुद के ही एचओडी ने ले लिया इंटरव्यू, दे दिए 65 नंबरछत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) में हुए पिछले विवादों के बाद भी अधिकारियों ने कोई सीख नहीं ली है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार हो रही 'कार्डियक एनेस्थेटिस्ट' (सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर) की नियमित भर्ती में बड़ा खेल सामने आया है। सोमवार को हुए इंटरव्यू के बाद जारी चयन सूची में एक ऐसे अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया है, जिसके पास अनिवार्य डीएम या डीएनबी की डिग्री ही नहीं है। वहीं, पांच साल का अनुभव रखने वाले वैध डिग्रीधारी डॉक्टरों को चयन से बाहर कर दिया गया है।

AIIMS Raipur: खास मेहरबानी चलते दिए नंबर

'पत्रिका एक्सपोज़' की पड़ताल में सामने आया कि चयनित अभ्यर्थी अभी एम्स में डीएम की पढ़ाई कर रहा है और उसका कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है (परीक्षा जुलाई में होनी है)। सबसे गंभीर बात यह है कि अभ्यर्थी का इंटरव्यू उसी विभाग के विभागाध्यक्ष ने लिया, जिनके अधीन वह पढ़ाई कर रहा है। नियमानुसार, यदि कोई अभ्यर्थी संस्थान का छात्र हो, तो वहां की फैकल्टी इंटरव्यू बोर्ड में शामिल नहीं हो सकती। इस 'खास मेहरबानी' के चलते छात्र को इंटरव्यू में 100 में से 65 नंबर दिए गए, जबकि डिग्रीधारियों को महज़ 45 नंबर देकर बाहर कर दिया गया।

डीएनबी डिग्री के बाद 5 साल अनुभव, फिर भी चयन नहीं

पीएससी ने उस डॉक्टर का चयन नहीं किया है, जिनके पास कार्डियक एनीस्थीसिया में डीएनबी की डिग्री है और 5 साल का अनुभव है। कायदे से चयन उनका होना था, लेकिन नहीं हुआ। पीएससी ये किस आधार पर किया, वही बता सकते हैं। पीएससी के नियम के अनुसार इंटरव्यू में अगर डीएम या डीएनबी डिग्रीधारी डॉक्टर है, तो बिना वैध डिग्री वाले डॉक्टर का चयन नहीं कर सकता। वैध डिग्री का मतलब है डीएम या डीएनबी। बिना डिग्री या ट्रांजिक्शन पीरियड वाले डॉक्टर का चयन उसी शर्त पर किया जाएगा, जब इंटरव्यू में डीएम या डीएनबी वाला डॉक्टर न हो।

क्या कहता है 'ट्रांजिक्शन पीरियड' का नियम?

राज्य सरकार ने सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की कमी को देखते हुए 'ट्रांजिक्शन पीरियड' का नियम बनाया है। इसके तहत यदि किसी डॉक्टर के पास एमडी (एनीस्थीसिया) की डिग्री है और उसने तीन साल कार्डियक एनीस्थीसिया में काम किया है, तो वह आवेदन कर सकता है। लेकिन सीजीपीएससी के नियम स्पष्ट हैं, बिना सुपर स्पेशलिटी डिग्री वाले डॉक्टर का चयन केवल उसी स्थिति में हो सकता है, जब इंटरव्यू में कोई भी डीएम या डीएनबी डिग्रीधारी डॉक्टर उपलब्ध न हो। यहां इंटरव्यू में बकायदा डीएनबी डिग्री और 5 साल का अनुभव रखने वाले डॉक्टर मौजूद थे, फिर भी बिना डिग्री वाले छात्र को चुन लिया गया। इस विसंगति के कारण अब चयन सूची का पुरज़ोर विरोध शुरू हो गया है।

वर्जन

डीएम डिग्री के बिना किस तरह कार्डियक एनेस्थेटिस्ट का चयन कर लिया गया, इस पर परीक्षा नियंत्रक से बात कर ही कुछ कह पाऊंगा। मामले की पूरी वस्तुस्थिति की जानकारी ली जाएगी।

-डी. राहुल वेंकट, सचिव, सीजीपीएससी