
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को गन्ना उत्पादक कृषकों को गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 68.90 करोड़ और गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 5.35 करोड़ रुपए की राशि ऑनलाइन खाते में ट्रांसफर की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना धीरे-धीरे साकार हो रही है। गोधन न्याय योजना के तहत गांवों में बनाए गए गोठानों में से 3089 गोठान स्वावलंबी हो गए हैं। यह एक बड़ा बदलाव है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खरीफ की तरह रबी सीजन में भी वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देने और गोठानों में गो-मूत्र की खरीदी को प्रोत्साहित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री कहा, गन्ना उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे उन्हें खेती की लागत में भी राहत मिल रही है। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह भी मौजूद थे।
गोबर विक्रेताओं को अब 179.28 करोड़ का भुगतान
कार्यक्रम में गोठनों में 15 से 31 अक्टूबर तक पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए 2.35 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4.69 करोड़ का भुगतान किया गया। गोठान समितियों को 39 लाख और महिला समूहों को 27 लाख का लाभांश दिया गया। गोबर विक्रेताओं को योजना के शुरू होने के बाद से अब तक 179.28 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।
83 गोठानों में गो-मूत्र की खरीदी
राज्य के 83 गोठानों में 4 रुपए लीटर की दर से अब तक 76 हजार 820 लीटर गो-मूत्र क्रय किया जा चुका है। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 24,348 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 18,722 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत तैयार किया गया है, जिसमें से 20,521 लीटर ब्रम्हास्त्र और 14,055 लीटर जीवामृत की बिक्री से कुल 15 लाख रुपए की आय हुई।
Published on:
08 Nov 2022 09:23 pm
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