
प्रतीकात्मक फोटो
इस कारण आंखों की इस खतरनाक बीमारी के केस बढ़ते जा रहे हैं. जी हां तनाव के कारण ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। धुंधला दिखे या रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी रंग दिखे तो अलर्ट रहने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में तत्काल नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाने की जरूरत है। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिले तो ग्लूकोमा को ठीक किया जा सकता है।
एम्स, आंबेडकर व निजी अस्पतालों में हर माह ऐसे 5 से 7 केस आ रहे हैं। ये चिंताजनक स्थिति इसलिए भी है, क्योंकि किसी को एक बार ग्लूकोमा हो गया तो आंखों की रोशनी दोबारा नहीं लौट सकती। ग्लूकोमा को नेत्र चोर भी कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ग्लूकोमा होने का कारण आंख के अंदर का बढ़ा हुआ दबाव (इंट्रा ओकुलर प्रेसर) है, जो आंख के तरल पदार्थ के ठीक से बाहर न निकल पाने के कारण होता है। यह बढ़ा हुआ दबाव ऑप्टिक तंत्रिका (ऑप्टिक नर्व) को नुकसान पहुंचाता है। एक रिसर्च के अनुसार स्ट्रेस ग्लूकोमा का रिस्क बढ़ा सकता है। अस्पतालों में ऐसे केस आ रहे हैं, जिसमें काम या पारिवारिक दबाव के कारण कुछ मरीजों को ग्लूकोमा का लक्षण देखा गया है। अब एडवांस मशीनों से ग्लूकोमा के प्रारंभिक लक्षण या जिनमें लक्षण नहीं दिखाए देते, उनकी बीमारी की पहचान की जा सकती है।
शुरुआत में साइड का विजन (पेरिफेरल विजन) धीरे-धीरे कम होने लगता है।
तनाव के कारण ग्लूकोमा के केस बढ़ रहे हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। अब एडवांस मशीनों से ग्लूकोमा को शुरुआती स्टेज से पकड़ा जा सकता है। यही नहीं बिना लक्षण के भी ग्लूकोमा के संकेत पहले ही पकड़ में आ रहे हैं। समय रहते इलाज होने से आंख का विजन वापस लाया जा सकता है। धुंधला या बल्ब के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे दिखे तो इलाज की जरूरत है।
-डॉ. अनिल गुप्ता, सीनियर नेत्र सर्जन
Updated on:
16 Mar 2026, 3:52 PM IST
Published on:
15 Mar 2026, 6:36 PM IST
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