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भुइयां सॉफ्टवेयर में हुई बड़ी गलती, अधिकारियों के फीड किए रिकॉर्ड में मिल रहा बड़ा अंतर

खसरे में तो भूखंड का विभाजन कर लिया जाता है, लेकिन नक्शे में नहीं किया जाता है जिससे राजस्व रिकार्ड में अंतर आ रहा है

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jameen khasra

भुइयां सॉफ्टवेयर में हुई बड़ी गलती, अधिकारियों के फीड किए रिकॉर्ड में मिल रहा बड़ा अंतर

रायपुर. राजस्व अधिकारियों ने भुइयां सॉफ्टवेयर में बड़ी गड़बड़ी कर डाली है। यह गलती एक जिले में नहीं तकरीबन 22 जिले में हुई है। नामांतरण, बंटवारा के बाद जब भी रेकॉर्ड दुरुस्त किया जाता है। तब खसरे में तो भूखंड का विभाजन कर लिया जाता है, लेकिन नक्शे में नहीं किया जाता है जिससे राजस्व रिकार्ड में अंतर आ रहा है। यह अंतर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। विभाग के सचिव ने भुइयां सॉफ्टेयर में सभी 27 जिले का रेकॉर्ड खंगाला तो पाया कि ( दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद ) को छोड़ कर रायपुर राजधानी समेत अन्य 21 जिलों का खसरा पाचसाला में भूखंडो की संख्या तथा भू-नक्शा में भूखंडो की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर है।

उन्होनें अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि फील्ड स्तर पर नक्शा के अनुरुप दुरुस्ती की कार्रवाई नहीं की जाती है। खसरा- पंचसाला में खसरों की संख्या बढ़ती जा रही है तथा नक्शे की स्थिति पुरानी ही बनी हुई है।

बंदोबस्त की कार्यवाही के दौरान किसी ग्राम का सर्वेक्षण कर राजस्व अभिलेख जैसे भू-नक्शा एवं खसरा तैयार किया जाता है। इस दौरान ग्राम के समस्त भूमि को भूखंडों को विभाजित किया जाता है। तथा नक्शे में प्रत्येक भूखंड को बढ़ते हुए क्रम में प्रथक-प्रथक भूखंड क्रमांक, जिसे खसरा नंबर कहा जाता है,आवंटित किया जाता है। इस तरह भू-अभिलेख तैयार करने के बाद किसी ग्राम के नक्शे में जितने भूखंड निर्धारित किए जाते हैं, उतने ही खसरे में खसरा नंबर भी निर्धारित किए जाते हैं। भविष्य में जब भी भूमि में क्रय-विक्रय, नामांतरण, बंटवारा आदि के कारण भू-खंडो का विभाजन होता है, तब खसरा पंचसाला में अभिलेख संशोधन किया जाता है। इसके बाद नक्शे में भी भूखंड का विभाजन की कार्रवाई की जाती है। इस तरह अभिलेख संशोधित होने के बाद उस गांव का खसरा पंचसाला मंे दर्शित भूखंडो की संख्या तथा नक्शे में दर्शित भूखंडो की संख्या एक समान होती है। लेकिन यह देखा जा रहा है कि नामांतरण, बंटवारा आदि के कारण जब भी रेकॉर्ड दुरुस्त किया जाता है। तब खसरे में तो भूखंड का विभाजन कर लिया जाता है, लेकिन नक्शे में नहीं किया जाता है जिससे राजस्व रेकॉर्ड में अंतर आ रहा है।

दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद जिले में आश्चर्यजनक रुप से नक्शे में खसरा नंबर की संख्या ज्यादा है एवं खसरे में कम है। विभागी अधिकारियों का कहना है प्रदेश के राजस्व अभिलेखों जैसे खसरा-पंचसाला तथा नक्शा का शत-प्रतिशत कंप्यूटरीकरण कर लिया गया है। जिसे कृषि भूमि का पूरा रेकॉर्ड मिल रहा है। लेकिन उपरोक्त जिलों मंे हुई गड़बड़ी को तीन माह में सुधारने का समय दिया गया है।

छग राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव केआर पिस्दा ने कहा कि सभी जिलों में रेकॉर्ड दुरुस्ती के दौरान बड़ी गड़बड़ी की गई है। फील्ड स्तर पर लापरवाही की जा रही है। सभी जिलांे को ३ माह का समय दिया गया है।