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अफसरों के छूटे पसीने जब क्लर्क के करतूतों का खुला राज, चोरी छिपे कर रहा था ये काम

नकली रॉयल्टी पर्ची से क्लीयरेंस लेकर 17 लाख के खनिज राजस्व की क्षति पहुंचाने के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के खनिज विभाग में तेलगी जैसा घोटाला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है इस घोटाले का मुख्य आरोपी विभाग का क्लर्क है जो चोरी छिपे तरीके से इस घोटाले को अंजाम दे रहा था। हालांकि, नकली रॉयल्टी पर्ची से क्लीयरेंस लेकर 17 लाख के खनिज राजस्व की क्षति पहुंचाने के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले में खनिज विभाग के बाबू को मुख्य आरोपी बनाया गया है। दो माह पहले खनिज विभाग ने सिविल लाइन थाने में मामले में अपराध दर्ज कराया था।

इसके बाद केस विशेष अपराध अनुसंधान सेल को सौंपा गया। मामला सितम्बर 2013 का है। पुलिस की जांच में बात सामने आई कि राजनांदगांव में नाला निर्माण के लिए मेसर्स संतोष अग्रवाल द्वारा 4232 टन और 3553 घनमीटर गिट्टी के रॉयल्टी क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया गया था। ठेकेदार ने इसके एवज में एक शपथ पत्र भी दिया था कि क्लीयरेंस के लिए प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज सही हैं।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े की शिकायत के बाद रायपुर खनिज विभाग द्वारा जब प्रस्तुत की गई 206 रॉयल्टी पर्चियों की जांच की गई। जांच सील का मिलान नही होने पर खुलासा हुआ कि सभी रॉयल्टी पर्ची नकली है। जिसके बाद सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए जिसमें सभी आरोपियों की संलिप्तता से यह खेल किया गया।

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पुलिस के मुताबिक राजेंद्र गिलहरे द्वारा विभाग की असली रॉयल्टी पर्चियों ने नंबर संदीप उर्फ बिट्टू जैन को बताया जाता था। बिट्टू जैन उन पर्चियों की नकली पर्ची प्रिंट कर ठेकेदारों को उपलब्ध कराते थे। इसके लिए इन लोगों ने दलाल भी सक्रिय कर रखे थे। ये दलाल विभाग में क्लीयरेंस के लिए आने वाले ठेकेदारों को नकली पर्ची देकर क्लीयरेंस कराने के लिए 40 प्रतिशत दलाली में सौदा करते थे।

ऐसे खुला मामला
ठेकेदार ने 206 चूना पत्थर के लिए रॉयल्टी पर्ची राजनांदगांव के जिला खनिज विभाग में जमा किया। यह पर्ची रायपुर स्थित खदान के लिए थी। लिहाजा रायपुर जिला प्रशासन को पर्चियां जांच के लिए भेजी। संबंधित खदानों के पट्टेदारों से पर्ची के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपनी पर्ची होने इंकार किया।

एक-एक करके नाम आया सामने
खनिज विभाग से दी गई शिकायत के मुताबिक पेटी ठेकेदार आशुतोष अग्रवाल ने पेटी ठेकेदार अजय अग्रवाल से मिलकर क्लीयरेंस के लिए रॉयल्टी पर्ची जमा की थी। पुलिस की पूछताछ में अशुतोष अग्रवाल ने सुरेश उर्फ बंटी होता से नकली रॉयल्टी पर्ची मिलने की बात बताई। सुरेश उर्फ बंटी से पूछताछ की गई तो उसने रितेश चौधरी के बारे में बयान दिया।

आरोपियों ने 16 लाख 92 हजार 800 रुपए नकली रॉयल्टी फर्जी जमा की थी। रितेश चौधरी ने अपने बयान में संदीप जैन उर्फ बिट्टू के माध्यम से रॉयल्टी पर्ची को प्रिटिंग का मास्टर माइंड बताया। बिट्टू ने पुलिस को बताया कि खनिज विभाग का क्लर्क राजेंद्र गिलहरे से रॉयल्टी पर्चियों के नंबर लीक किए जाते थे।

इनकी हुई गिरफ्तारी
खनिज विभाग का बाबू राजेंद्र गिलहरे, सेल टैक्स कॉलोनी निवासी अजय कुमार अग्रवाल, न्यू शांति नगर निवास मेसर्स संतोष अग्रवाल के पार्टनर आशुतोष अग्रवाल, शताब्दी नगर, तेलीबांधा निवासी संदीप जैन उर्फ बिट्टू, हनुमान नगर निवासी सुरेश उर्फ बंटी होता, नेहरू नगर निवासी रितेश मानिकपुरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

14 अगस्त को पत्रिका ने बताया था आरोपी
पत्रिका ने 14 अगस्त को प्रकाशित खबर में बताया था कि विभाग के ही बाबू ने रॉयल्टी क्लीयरेंस का खेल रचा था। यदि विभाग पहले से सतर्क होता तो इतना बड़ा घोटाला नहीं होता।

राजद्रोह का मामला
पुलिस ने धारा 467, 468, 471, 120 बी के तहत अपराध दर्ज किया है, जबकि रायल्टी बुक की नकली प्रिंटिग करना राजद्रोह की श्रेणी में आता है। पुलिस ने अभी तक इस मामले में मामूली धाराओं के तहत कार्रवाई की है।