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बाजार से गायब ब्रांडेड सीमेंट, हड़ताल से 7000 ट्रकों के पहिए थमे, घर-मकान, सरकारी काम रूका

- ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने मालभाड़ा बढ़ाने की मांग रखी, 20 दिनों से हड़ताल जारी- सीमेंट कंपनियों के साथ बातचीत का नहीं निकल सका नतीजा

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Cement hardening, building a house becomes expensive due to heating of iron

रायपुर. डीजल की कीमतों में बेतहाशा महंगाई के बाद सीमेंट परिवहन करने वाले ट्रक मालिकों की बेमुद्दत हड़ताल जारी है। सीमेंट कंपनियों से मालभाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर 20 दिनों से चल रही हड़ताल के बाद भी ट्रक मालिकों, कंपनी और प्रशासन के बीच बातचीत नहीं बन पाई है। इसका खामियाजा अब आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि बाजार से ब्रांडेड सीमेंट गायब हो चुका है। जहां स्टॉक हैं, वहां मनमानी कीमत वसूल की जा रही है। 240-250 रुपए की सीमेंट 300 से 350 रुपए में ब्लैक में बेची जा रही है।

इसकी वजह से ना सिर्फ आम आदमी के मकान का कामकाज प्रभावित हुआ है, बल्कि बिल्डरों के साथ सरकारी काम-काज भी थम गया है। छत्तीसगढ़ में 11 सीमेंट कंपनियां हैं, जहां से रोजाना 2200 से ज्यादा ट्रकों से देशभर में सप्लाई की जाती है। ट्रक एसोसिएशन के मुताबिक मालभाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश में 7000 ट्रकों के पहिए थम चुके हैं। गौरतलब है कि इस मामले में बीते दिनों परिवहन मंत्री मो. अकबर के निवास पर और बलौदाबाजार कलक्टर के साथ बैठकें हो चुकी है। फिर भी कंपनियों ने ट्रांसपोर्टरों की मांगें नहीं मानी है।

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25 फीसदी सीमेंट की आपूर्ति छत्तीसगढ़ से
देशभर में सीमेंट की आपूर्ति पर गौर करें तो छत्तीसगढ़ की 11 कंपनियों से ओडि़शा, झारखंड, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और अन्य राज्यों में आपूर्ति होती है। देशभर में 25 फीसदी सीमेंट की आपूर्ति छत्तीसगढ़ से होती है। हड़ताल की वजह से बाहरी राज्यों में भी किल्लत आ चुकी है। ट्रक मालिकों के मुताबिक बालाघाट, मंडला, जबलपुर, भुवनेश्वर, विशाखापट्नम में भी रायपुर जैसे हालात है।

क्रेडाई ने कहा-रास्ता निकलना चाहिए
इस मामले में क्रेडाई छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का कहना है कि बाजार में सीमेंट की उपलब्धता नहीं होने की वजह से मुनाफाखोरी शुरू हो चुकी है। यदि यही हालात रहे तो कंस्ट्रक्शन लागत बढ़ेगी और लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। बाजार पर भी बुरा असर पड़ेगा। हड़ताल की समाप्ति के लिए बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

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25 फीसदी राहत देने तैयार नहीं कंपनियां
ट्रक संघों के मुताबिक 20 दिनों में तीन से चार बार की बैठकें हो चुकी है, जिसमें ट्रक मालिकों ने प्रशासन के निर्देश के बाद मालभाड़ा में 40 फीसदी वृद्धि की मांग को कम करते हुए 25 फीसदी तक ला दिया है। इसके बाद भी सीमेंट कंपनियां मांगों को मानने को तैयार नहीं है। अलग-अलग कंपनियां 5, 10,12 फीसदी ही मालभाड़ा बढ़ाने के पक्ष में हैं, जिस पर ट्रक संघों ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

रायपुर-बस्तर कोरापुर संघ अध्यक्ष सुखदेव सिंह सिद्धू ने कहा, सीमेंट कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें हुई, लेकिन कंपनियां मालभाड़ा बढ़ाने को तैयार नहीं है। हम अपनी मांगों पर अडिग है। मालभाड़ा बढ़ाने के साथ कंपनियों द्वारा नीलामी सिस्टम बंद होना चाहिए। हमने अपनी मांगें प्रशासन और कंपनियों को सौंप दिया है।

सीमेंट परिवहन संघ की प्रमुख मांगें
1. सीमेंट कंपनियों द्वारा बीडिंग सिस्टम पर रोक लगाई जाए।
2. परिवहन दर में पारदर्शिता लाई जाए। ट्रक यूनियन को पता होना चाहिए कि वास्तविक दर क्या है।
3. प्रतिदिन भाड़ा सुनिश्चित की जाए। मालभाड़ा में वृद्धि की जाए।

हड़ताल को इन प्रमुख संगठनों का समर्थन
1. छग सीमेंट परिवहन संघ
2. रायपुर-बस्तर कोरापुर परिवहन संघ
3. बलौदाबाजार ट्रक मालिक संघ
4. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस
5. बिलासपुर ट्रक ओनर्स एसोसिएशन
6. दुर्ग ट्रक मालिक संघ