
सावधान? कहीं फिर से ठगी न हो जाए, राजधानी में चल रहा प्रोडक्ट बेचकर रकम लगाने का नेटवर्क बिजनेस
रायपुर। रायपुर के साथ ही कई जिलों में कुछ लोगों ने प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर नेटवर्क बिजनेस शुरू कर दिया है और यह कंपनियां वेबसाइट के प्रमोशन या प्रोडक्ट खरीदने के नाम पर लोगों से पैसा लगवाकर अपना नेटवर्क बिजनेस बढ़ा रही हैं। नेटवर्क बिजनेस के जरिए धड़ल्ले से पैसा लगाने का खेल हो रहा है। बीते 5 सालों में जिस तरह से चिंटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी सामने आई है उसे देखते हुए अब कुछ कंपनियां अलग तरीके से लोगों से रकम लगवा कर बदले में कुछ प्रोडक्ट दे रही हैं। रायपुर में कुछ कंपनियों की पत्रिका एक्सपोज ने पड़ताल की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए।
बीते साल तक चिटफंड कंपनियों की 90 हजार से अधिक शिकायते पुलिस के पास पहुंची थी जिसमें से अकेले रायपुर की 50 हजार शिकायते थी। कंपनी ने कम समय में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर 24 जालसाज कंपनियों ने पिछले पांच साल में करीब 200 करोड़ की ठगी की थी।
ग्रामीण इलाकों में द्यादा ग्राहक मिल रहे
रायपुर में ही काम कर रही इन कंपनियों का नेटवर्क कई जिलों में फैल रहा है। ग्रामीण अंचल में कंपनी के एजेंट सक्रिय है और लोगों को प्रोडक्ट का झांसा देकर पैसा जमा कराकर नेटवर्क को बढ़ा रहे हंै। वहीं कुछ लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस से भी है लेकिन पुलिस के पास अभी तक इन कंपनियों का कोई फ्राड सामने नहीं आया है और कागजों में कंपनी ने अपने आप को मजबूत कर रखा है जिससे पुलिस द्वारा भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और यह कंपनियां नेटवर्र्किंग का कार्य बहुत की आराम से कर रही है।
बीते 5 सालों में चि़टफंड कंपनियों ने जिस तरह से नेटवर्क बनाकर लोगों को फंसाया और उनसे करोड़ों की रकम लेकर फरार हो गई। अब 5 साल बाद फिर से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से यह कंपनियां पूरे होमवर्क के साथ मैदान में उतरी है। लोग इन कंपनियों में पैसा भी लगा रहे हैं। अभी इन कंपनियों को बने ज्यादा समय नहीं हुआ है इस कारण पुलिस भी कुछ करने में असमर्थ नजर आ रही है।
केस 2
सराई पाली से भी कुछ लोगों ने पैसा लगाया इन्हीं में से एक केशव लाल ने बताया कि उसने 999 के चार प्रोडक्ट खरीदे। उसकी एक आईडी में 3 लोग जुड़ गए जिससे उसे मुनाफा मिलने लगें। अब वो अन्य लोगों को इसके बारे में बता रहा है कि किस तरह आप बस एक सामान खरीद कर घर बैठे-बैठे अपनी रकम को दोगुना कर सकते हो। कुछ लोगों ने उनके साथ मिलकर कुछ सामान भी खरीदें। इस तरह केशव के जरिए कई लोग जुड़ रहे है, लेकिन यह कितने दिन चलता है यह तो समय ही बताएंगा?
चिटफंड कंपनियों का बेसिक एक जैसा
सारी चिटफंड कंपनियों का कार्य करने का तरीका एक जैसा होता है। प्रदेश में साल 2003 से चिटफंड कंपनियां सबसे अधिक सक्रिय थी। एक सरकारी संस्था के सर्वेक्षण में भी यहीं बाते सामने आई थी कि इन चिटफंड कंपनियों का एक ही फार्मूलें पर काय4 करती है और रकम को कम समय में दोगुना या तिगुना करने का प्लान लेकर आती है। कंपनी पूरी तरह से एक ठोस कार्ययोजना बनाती है और पूरी योजना को अंजाम देने के लिए कंपनियों के संचालक सबसे पहले किसी स्थानीय व्यक्ति का एजेंट के रूप में चयन करते हैं। एजेंट भी ऐसे व्यक्ति को चुनते है जो बेरोजगार हो और उसकी छवि अच्छी हो क्योंकि कोई भी व्यक्ति स्थानीय व्यक्तियों के जरिए ही इन चिटफंड कंपनियों में पहली बार रकम निवेश करते हैं।
दस्तावेज अवैध मिलने पर कार्रावाई करते है
इस तरह की कंपनियों की अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है लेकिन हम सर्वे कराकर पता कराते है यदि कंपनी के दस्तावेज गलत निकले पर आईपीसी के तहत कार्रवाई करेंगे।
प्रफुल्ल ठाकुर, एडीशनल एसपी रायपुर
Published on:
03 Feb 2020 08:53 pm
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