रायपुर। राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्तम चौक में एक सरोना चौक। यहां हादसों पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। लेकिन इन सिग्नल्स का मिनी बस चालकों के लिए कोई मतलब नहीं है। वे अंधी रफ्तार में अपनी बस दौड़ाते हुए सिग्नल को धता बताकर निकल जाते हैं। कोई रोकने वाला नहीं, कोई टोकने वाला नहीं। इस पूरे रिंग रोड क्रमांक 1 पर इनकी दादागिरी ही चलती है। हां, कभी कभार यहां पर पुलिस चेकिंग का प्वाइंट लगता है लेकिन वे भी सिर्फ दोपहिया चालकों की चेकिंग करते हैं। आटो चालक और मिनी बस चालकों पर इनका कोई बस नहीं। अक्सर देखा जाता है कि बस चालक सर्विस रोड का इस्तेमाल कर शॉर्ट कट अपनाते हुए निकल जाते हैं। इस कारण दोपहिया चालकों और अन्य लोगों में डर का माहौल रहता है। बताते चलें कि इस चौक के आसपास स्कूल भी हैं, जिस कारण बच्चों और उनके अभिभावकों का यहां पर आना-जाना होता रहता है। आम आदमी जब ट्रैफिक सिग्नल तोड़ता है तो उसके घर पर चालान पहुंच जाता है क्या मिनी बस चालकों के केस भी पुलिस ऐसा करती है।