
बजट का नया समीकरण, खजाने का 40% हिस्सा 'मदद' के नाम ( Photo - Patrika )
CG Budget 2026: राहुल जैन. देशभर में फ्रीबीज यानी मुफ्त की योजनाओं को लेकर बहस तेज है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नाराजगी जताई है। ऐसे में पत्रिका ने छत्तीसगढ़ के बजट की पड़ताल की। इसमें कई चौंकाने वाली तस्वीर सामने आईं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी अन्य मूलभूत जरूरतों पर सरकार जितना पैसा खर्च नहीं कर रही है, उससे अधिक तो सहायता और सब्सिडी में खर्च हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के मुख्य बजट का 40 प्रतिशत हिस्सा सहायता एवं सब्सिडी मद में खर्च हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति राजनीतिक दलों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन दीर्घकाल में राज्य की आर्थिक सेहत और विकास योजनाओं पर बड़ा असर डालती है। केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी चिंता जताई गई है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश होने वाले मुख्य बजट पर सभी की निगाह टिकी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट के मुताबिक राज्य की कुल प्राप्तियां लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपए आंकी गई हैं, जो पिछले वर्ष के 1.47 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 12 फीसदी अधिक है।
यही बढ़ता हुआ आकार अब बड़ी संख्या में सहायता, अनुदान, छूट और मुफ्त सुविधाओं की ओर मुड़ रहा है, जबकि सड़कों, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों की ज़रूरतें अभी भी अधूरी हैं। बजट में सहायता एवं सब्सिडी पर 40 फीसदी, प्रतिबद्ध व्यय 34 फीसदी, पूंजीगत व्यय 16 फीसदी और अन्य व्यय पर 10 फीसदी राशि खर्च होती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब बजट का बड़ा हिस्सा पहले से लिए गए कर्ज के ब्याज और चल रही फ्रीबीज़ स्कीमों को जारी रखने में ही खपने लगे, तो नई परियोजनाओं के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाता है।
छत्तीसगढ़ में बीते वर्षों में किसानों, बिजली उपभोक्ताओं, छात्रों, महिलाओं और गरीब तबकों को राहत देने के नाम पर कई तरह की सहायता और सब्सिडी दी जाती रही है। इनसे ग्रामीण जेब में तत्काल नकद राहत, कम बिजली बिल, सस्ती या मुफ्त सेवाओं के रूप में त्वरित लाभ दिखता है, जो चुनावी मौसम में राजनीतिक रूप से बेहद आकर्षक भी साबित होता है। वर्ष 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने की बड़ी वजहों में से एक कारण किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी करने का वादा था। इसी प्रकार वर्ष 2023 सत्ता परिवर्तन में महतारी वंदन योजना ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2023 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग का बजट सबसे अधिक 112 फीसदी बढ़ा था। इसकी वजह महंतारी वंदन योजना की किस्त थी। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक हर महीने करीब 70 लाख महिलाओं के खाते में एक-एक हजार रुपए की राशि दी जाती है।
मुफ्त की योजनाओं से निकलने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है। इसका उदाहरण हमारे देश में पहले से मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर लाखों लोगों ने अपनी मर्जी से गैस की सब्सिडी छोड़ दी थी। अभी राज्य सरकार ने इनकम टैक्स जमा करने वाले लोगों का गरीबी रेखा का राशन कार्ड रद्द किया है। इस कार्ड में भी कई तरह की सब्सिडी मिलती थी।
राजनीतिक दलों की वजह से फ्रीबीज का चलन तेजी से बढ़ा है। आज-कल चुनाव जीतने के लिए यह सबसे आसान रास्ता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को एक होकर कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए। नीति बनाने वालों को भी इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
बीकेएस रे, रिटायर्ड आईएएस
फैक्ट फाइल
2025-26 में बजट का खर्च
मद- प्रतिशत
सहायता एवं सब्सिडी-40
प्रतिबद्ध व्यय- 34
पूंजीगत व्यय-16
2024-25 में बजट का खर्च
मद- प्रतिशत
सहायता एवं सब्सिडी-41
प्रतिबद्ध व्यय- 34
पूंजीगत व्यय-15
टॉप 5 विभाग में बजट का खर्च
विभाग- प्रतिशत
शिक्षा विभाग-12
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग-10
कृषि विभाग एवं किसान कल्याण विभाग-08
लोक निर्माण विभाग-05
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग-05
बाक्स
यह है सहायता और सब्सिडी का खर्च
योजनाएं- राशि (करोड़ों में)
किसानों को बोनस-12000
धान खरीदी का घाटा- 8000
महतारी वंदन योजना-8000
बिजली बिल में रियायत-7500
राशन में सब्सिडी-8000
उद्योगों को राहत-1500
तेंदूपत्ता में बोनस-250
अन्य योजनाएं-5000
Updated on:
23 Feb 2026 01:27 pm
Published on:
23 Feb 2026 01:22 pm
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