
CG Election 2025: इस बार के नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम में कई रंग देखने को मिले। आम जनता की पहली पसंद ट्रिपल इंजन की सरकार बनी। भाजपा की जीत के कई कारण है। इसमें भाजपा का सत्ता में रहना और घोषणा पत्र की भी अहम भूमिका है। मतदाताओं ने भाजपा के घोषणा पत्र पर भरोसा जताया। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि भाजपा अपनी घोषणाओं को आम मतदाताओं के बीच पहुंचाने में कामयाब रही।
ठीक इसके विपरीत कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में घोषणा पत्र जारी कर मतदाताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन यह बात धरातल पर नहीं उतर सकी। इसके अलावा कांग्रेस में भितरघात भी जमकर हुआ। जबकि भाजपा के महापौर और पार्षद प्रत्याशी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ते नजर आए। प्रचार की दृष्टि से भी उनकी टीम मजबूत दिखाई दी।
हालांकि कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी को कम नहीं आंका जा सकता, लेकिन प्रदेश में भाजपा की सत्ता होने से मतदाताओं का मन बदलते दिखाई दिया। पंद्रह सालों तक नगर निगम की सत्ता में काबिज रही कांग्रेस की इतनी करारी हार कभी नहीं हुई। अब तक जितने भी चुनाव हुए हमेशा सम्मानजनक स्थिति रही। परंतु ऐसा पहली बार है, जब जितनी संख्या में निर्दलीय जीता करते थे, सिर्फ उतनी ही संख्या केवल 7 कांग्रेस पार्षद जीत पाए।
सबसे बड़ा झटका सीटिंग महापौर एजाज ढेबर, एमआईसी सदस्य और जोन अध्यक्षों समेत तीन-चार बार के पार्षदों को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, पांच साल महापौर और पांच साल सभापति रहे प्रमोद दुबे की पत्नी महापौर प्रत्याशी दीप्ति दुबे डेढ़ लाख से ज्यादा मतों से हारी हैं।
निवृत्तमान महापौर एजाज ढेबर के पारंपरिक वार्ड मौलाना अब्दुल रऊफ वार्ड-45 से भले ही उनकी पत्नी अरर्जुमन ढेबर ने जीत हासिल कर ली है। परंतु पांच साल तक मेयर रहे एजाज ढेबर पं. भगवती चरण शुक्ल वार्ड 57 से नहीं जीत पाए। उन्हें करारी हार मिली। जबकि पिछले चुनाव में इसी वार्ड से जीतकर प्रमोद दुबे सभापति बने थे।
नगर निगम चुनाव में इतना बड़ा उलटफेर कि तीन से चार के पार्षद, मेयर काउंसिल के सदस्य तक अपने-अपने वार्डों में न तो खुद की न ही पार्टी की साख बचा पाए। वहीं, कई एमआईसी सदस्यों के टिकट काटने का भी पार्टी को बड़ा झटका लगा।
भाजपा की जीत में प्रत्याशी चयन की अहम भूमिका रही। भाजपा ने नगर निगम चुनाव में नए चेहरों को मौका दिया। इसकी वजह से प्रत्याशियों को खिलाफ कोई एंटी इनकबेंसी नहीं दिखाई दी। जबकि नगर निगमों में कांग्रेस होने की वजह से पार्टी के खिलाफ एंटी इनकबेंसी रही। वहीं, कांग्रेस ने अपने दो पूर्व महापौर पर भी दांव खेला था।
इन सबके अलावा भाजपा ने समय पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी चयन में काफी पिछड़ी नजर आईं। स्थिति यह थी कि विवाद से बचने के लिए कांग्रेस ने आधी रात को सूची जारी की। नामांकन जमा करने के अंतिम दिन तक सूची जारी होती रही। रायपुर नगर निगम के चार वार्ड की सूची जारी ही नहीं हुइ। प्रत्याशियों को सीधे बी फार्म दिया गया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी थीं।
CG Election 2025: चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बैज संगठन में बदलाव की कवायद करते रहे, लेकिन गुटबाजी की वजह से पूरा बदलाव नहीं हो सका। जबकि जिलाध्यक्षों के बदलाव की खबरों से सक्रिय कार्यकर्ता चिंता में नजर आए। टिकट के लिए ज्यादा मथापच्ची करते नजर आए।
वहीं, टिकट वितरण से नाराज लोगों को मनाने का भी प्रयास नहीं किया गया। ठीक इसके विपरीत भाजपा ने अपने पूरे संगठन में बदलाव किया। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिलाध्यक्षों का चुनाव हुआ। इसके बाद भी टिकट वितरण में भाजपा संगठन में तालमेल दिखी। इसकी वजह से बगावत भी कम हुई। हालांकि पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े और कई ने जीत भी हासिल की।
Published on:
16 Feb 2025 09:30 am
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