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फिल्मकार एक क्लिक में कर सकेंगे सब्सिडी के लिए अप्लाई

प्रोड्यूसर एसोसिएशन और संस्कृति विभाग की बैठक में दूसरे राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ी फिल्मों में सब्सिडी देने की मांग उठी

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फिल्मकार एक क्लिक में कर सकेंगे सब्सिडी के लिए अप्लाई

बैठक के बाद प्रोड्यूसर एसोसिएशन के मेंबर्स ने गढ़कलेवा में सेल्फी ली।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.फिल्म पॉलिसी को लेकर प्रोड्यूसर एसोसिएशन और संस्कृति विभाग के बीच एक बैठक रखी गई। इसमें एसोसिएशन के मेंबर्स ने नीति को लचीला करने के लिए अपनी बात रखी। मसलन, शूटिंग की परमिशन के लिए कलेक्टर को आवेदन देना है, इस पर मेकर्स ने सलाह दी कि साथ में एसडीएम को भी जोड़ दिया जाए। क्योंकि कई बार कलेक्टर व्यस्तता के चलते रहते नहीं, कुछ स्थानों पर एसडीएम से परमिशन मिल सकती है। रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग के अलावा प्रोड्यूसर एसोसिएशन को भी शामिल किया जाए। इसी तरह कुछ प्वाइंट्स एसोसिएशन की तरफ से रखे गए। सबसे महत्त्वपूर्ण बात थी सब्सिडी बढ़ाए जाने की। पॉलिसी में दूसरे राज्यों की रीजनल फिल्मों के लिए छत्तीसगढ़ी के अपेक्षा ज्यादा सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है। जबकि यहां के लोगों को भी उसी तर्ज पर सब्सिडी दी जानी चाहिए।

आगे करेंगे संशोधन

वर्मा ने बताया, फिल्मकारों ने विभाग से मांग रखी कि सब्सिडी की राशि बढ़ाई जाए। इस पर विभाग की ओर से कहा गया कि अभी शुरुआत होने दीजिए। आगे हम संशोधन के लिए भेज देंगे। जब तक सब्सिडी की शुरुआत नहीं होगी, प्रैक्टिकल चीजें समझ नहीं आएंगी। बैठक में संतोष जैन, सतीश जैन, मनोज वर्मा, प्रकाश अवस्थी, अनुपम वर्मा, रॉकी दासवानी, अनुमोद राजवैद्य राज वर्मा, मुकेश क्षमानिधि मिश्रा, रुना शर्मा आदि मौजूद रहे।

एसोसिएशन से लें एनओसी

चर्चा के दौरान यह मांग भी रखी गई कि सब्सिडी की प्रक्रिया में एसोसिएशन से एनओसी को भी शामिल किया जाए। सीए के ऑडिट रिपोर्ट और तमाम नियमों को फॉलो करने के साथ ही प्रोड्यूसर एसोसिएशन से विभाग संबंधित निर्माता से एक एनओसी ले जिसे एसोसिएशन जारी करे।

शासन को अनुमोदन के लिए भेजा है

बैठक में फिल्मकारों से रायशुमारी की गई है। उन्होंने जो भी बातें रखी, उसे ध्यान में रखा जाएगा। नीति को अनुमोदन के लिए शासन को भेजा गया है, जल्द ही गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। फॉर्म भी तैयार कर दिया गया है ताकि निर्धारित प्रपत्र में चाही गई जानकारी भरी जा सके। खास बात ये है कि कोई भी निर्माता घर बैठे मोबाइल से ही इसे भर सकता है।

विवेक आचार्य, संचालक संस्कृति विभाग