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राज्य सरकार कम कर सकती है पेट्रोल-डीजल से वैट, सिंहदेव बोले- प्रस्ताव तैयार हो रहा, CM को सौंपेंगे

केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर जनता को बड़ी राहत दी, तो अब राज्य सरकार अपने हिस्से के वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) को भी कम करने की तैयारी कर रही है।

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राज्य सरकार कम कर सकती है पेट्रोल-डीजल से वैट, सिंहदेव बोले- प्रस्ताव तैयार हो रहा, CM को सौंपेंगे

रायपुर. केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर जनता को बड़ी राहत दी, तो अब राज्य सरकार अपने हिस्से के वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) को भी कम करने की तैयारी कर रही है। वाणिज्यिक कर मंत्री टीएस सिंहदेव (CG Minister TS Singhdeo) ने स्पष्ट तौर पर कीमतें कम होने की बात कही है। वाणिज्यिक कर विभाग सोमवार या फिर मंगलवार तक प्रस्ताव तैयार कर लेगा, जिसे सिंहदेव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) के समक्ष रखेंगे। सूत्रों के मुताबिक इसी हफ्ते सरकार जनता को वैट कम करने का ऐलान कर सकती है। ऐसा हुआ तो संभव है कि पेट्रोल के दाम जो रायपुर में 101.88 रुपए हैं वे 100 रुपए के नीचे आ जाएंगे और डीजल 93.78 रुपए से घटकर 90 रुपए के नीचे पहुंच जाएगा।

शनिवार को रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहदेव ने कहा, जिस दिन केंद्र द्वारा उत्पाद शुल्क कम किया गया था, उसी दिन मुख्यमंत्री से मेरी बात हुई थी। मैंने कहा था मैं प्रस्ताव देता हूं। वैट कम हो सकता है, इस पर निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा लिया जाना है। उन्होंने कहा कि अभी पेट्रोल और डीजल पर फ्लैट 25 प्रतिशत का फ्लैट रेट है। उत्पाद शुल्क कम होगा तो राज्यों का 41 प्रतिशत हिस्सा कम हो जाएगा। इसलिए केंद्र राज्यों पर दबाव बना रही हैं कि वैट को कम करो।

इन राज्यों के पेट्रोल-डीजल की दरों का राज्य सरकार कर रही अध्ययन
वाणिज्यिक कर विभाग वैट में कुछ और कमी हो सकती हैं क्या? इस सवाल के जवाब के लिए विभाग पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र की दरों का अध्ययन कर रहा है। सिंहदेव के समक्ष भी तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया जा चुका है। सभी पहलूओं पर अध्ययन जारी है। डीजल-पेट्रोल पर 1-2 रुपए अतिरिक्त लगता है।

राज्य सरकार का केंद्र पर हमला
राज्य सरकार ने केंद्र पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह जनता को गुमहार कर रही है। सिंहदेव ने कहा कि कच्चे तेल के दाम अभी ऐसे हैं, जिसके मुताबिक ऐसी अधिक नहीं होनीचाहिए। केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क के अतिरिक्त सेस ले रही है। अव्यवहारिकता यह है कि सेस की राशि राज्यों के साथ बांटी नहीं जाती। केंद्र सरकार इसे आमदनी का जरिया बनाकर अपने पास टैक्स के रूप में रख रही है। हिमाचल में महंगाई के चलते हार गए।

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