
Chhattisgarh Naxal's : बस्तर संभाग समेत प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में समानान्तर सरकार चलाने वाले नक्सलियों को शहरों से बड़ी मदद मिलती है। जरूरत की चीजों की सप्लाई के लिए वे शहरों पर ही निर्भर रहते हैं। अब ऐसे मददगारों की पुलिस की विशेष टीमें तलाश में लग गई हैं।
नक्सलियों के अर्बन नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी है। इसमें जेल से छूटे और शहरों में पकड़े गए नक्सल समर्थकों के वर्तमान स्थिति का पता लगाया जाएगा। उनके वर्तमान कामकाज, आय का जरिया, गतिविधियां आदि पर फोकस किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए पुलिस के इंटेलीजेंस टीम के अलावा एंटी नक्सल अभियान से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीते रविवार को नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा की। इस दौरान पुलिस और सुरक्षा से जुड़े आला अधिकारियों की बैठक ली थी। इसके बाद अर्बन नेटवर्क को खत्म करने पर काम शुरू कर दिया गया है।
दक्षिण बस्तर पर फोकस
नक्सलियों के सर्वाधिक प्रभावित दक्षिण बस्तर के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा के साथ ही माढ़ इलाके को टारगेट में रखा गया है। इसमें से बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले की सीमा आंध्रप्रदेश, तेंलगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा राज्य से जुड़ा हुआ है।
वहीं अबूझमाड़ की सीमा महाराष्ट्र से जुड़ी हुई है। इसे देखते हुए चारों राज्यों में तैनात नक्सल ऑपरेशन से जुडे़ हुए अधिकारियों के साथ बैठकर घेरेबंदी की जाएगी। बता दें कि नक्सलियों का सर्वाधिक मूवमेंट महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, ओडिशा के मलकानगिरी, आंध्रा के अल्लूरी सीतारमा राजू जिले से जुड़ी हुई है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की बैठक के बाद रविवार की देर रात पीएचक्यू में राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान प्रभावित इलाकों में फोर्स का मूवमेंट कराने पर चर्चा हुई। साथ ही स्पेशल ऑपरेशन को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
बताया जाता है कि नक्सलियों के सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में इंटेलिजेंस और फोर्स को अपनी गतिविधियां बढ़ाने के लिए कहा गया है। वहीं स्थानीय लोगों के जरिए इनपुट जुटाने के लिए कहा गया है। ऑपरेशन से जुड़े अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बीएसएफ की नई बटालियन के आने पर उन्हें सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में तैनात करने की योजना बनाई गई है। ताकि नक्सलियों को खदेड़ने के साथ ही उनके आम दरफ्त को रोका जा सकें।
क्या-क्या पहुंचता है शहर से
नक्सलियों तक शहर से दवाइयां, कपड़े, साइकिल, बाइक, हार्डवेयर के सामान, हथियार बनाने के लिए बारूद, लोहा व अन्य जरूरी सामान, खाने-पीने की चीजें, आर्थिक मदद जैसी कई चीजें भेजी जाती हैं। इसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाएं जाते हैं। कभी ठेकेदारों के माध्यम से तो कभी कारोबारियों के अलावा अन्य लोगों से भी मदद ली जाती है।
Published on:
23 Jan 2024 01:24 pm
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