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CG News: इस समाज ​के 4 बड़े फैसले, शोक की घड़ी में बर्तन किराया नहीं, विवाह पर बेटियों को 3000 देने और…

CG News: मंदिर हसौद धोबी समाज महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इनमें शोकाकुल परिवार को 3000 रुपए की आर्थिक सहायता देने समेत अन्य 4 प्रस्ताव पारित किया है...

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CG News

CG News: मंदिर हसौद धोबी समाज ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे समाज में सामाजिक सहयोग और सहानुभूति की नई मिसाल पेश की जा रही है। ( Chhattisgarh News ) समाज ने चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए हैं, जिनमें किसी भी परिवार में मृत्यु होने पर सामाजिक बर्तन का किराया न लेने, कफन के लिए कपड़ा न देने, शोकाकुल परिवार को 3000 रुपए की आर्थिक सहायता देने और बेटी के विवाह में 3 हजार रुपए का उपहार स्वरूप देने का निर्णय शामिल है।

CG News: इस नए निर्णय की शुरुआत मंदिर हसौद से की गई, जहां हाल ही में अगसिया बाई निर्मलकर का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके पुत्र को समाज की ओर से यह पहल करने का अवसर मिला, जब समाज के अध्यक्ष केजू राम रजक ने शोकाकुल परिवार को तीन हजार रुपए दिए। यह राशि समाज के निर्णय का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शोकाकुल परिवार की आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की गई है।

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CG News: एक प्रेरणास्त्रोत

धोबी समाज का यह निर्णय अन्य समाजों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हो सकता है। कदम समाजों के विभिन्न हिस्सों में सहयोग और सहानुभूति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समाजों के बीच एकजुटता और मदद की भावना को मजबूत करने के लिए पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। शहर जिला धोबी समाज के अध्यक्ष वरुण निर्मलकर ने उमीद जताई है कि अन्य समाज भी इस पहल को अपनाकर सामाजिक सहयोग की इस भावना को आगे बढ़ाएंगे।

धोबी समाज के निर्णय का उद्देश्य

प्रदेश धोबी समाज के अध्यक्ष सूरज निर्मलकर के निर्देश पर सभी जिला अध्यक्षों को इस निर्णय को लागू करने का आदेश दिया गया है। इस निर्णय का मुय उद्देश्य समाज के लोगों के बीच आपसी सहयोग और सहानुभूति को बढ़ावा देना है। संरक्षक धरमलाल निर्मलकर और क्षेत्रीय अध्यक्ष नीलू निर्मलकर सहित अन्य पदाधिकारी इस पहल को लेकर समाज के निचले स्तर पर भी लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि वे इस पहल को अपनाएं और समाज की सहायता के लिए आगे आएं।

इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा के बाद श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख पदाधिकारी जैसे राम सिंह निर्मलकर, नरेंद्र निर्मलकर, सेवक रजक, बहादुर रजक, गजानन निर्मलकर और मोहन उभय लाल निर्मलकर मौजूद रहे। समाज के संरक्षक धरमलाल निर्मलकर ने इस पहल को हर सुख और दुख के अवसर पर पालन करने की सलाह दी है, जिससे समाज में एक नई भावना उत्पन्न हो और सामाजिक समरसता और एकता को बल मिले।