
भाजपा की 89 की सूची में सिंधी समाज का एक भी नुमाइंदा नही, दिग्गजों के ने अटका दी एक सीट
रायपुर . सिंधी समाज के वोटों ने भाजपा का आसान सा दिखता चुनावी गणित उलझा दिया है। इसके चलते रायपुर शहर उत्तर की एक सामान्य सी सीट सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभरी है।
भाजपा अभी तक इस सीट पर उम्मीदवार का फैसला नहीं कर पाई। इस सीट से भाजपा के ही श्रीचंद्र सुंदरानी विधायक हैं। सुंदरानी कारोबारी हैं और सिंधी समाज से आते हैं। लेकिन पार्टी के पैमाने पर उनका प्रदर्शन खराब रहा है। व्यापारिक संगठनों में सुंदरानी की विवादास्पद साख भी उसकी एक वजह बनी है।
संगठन इस बार उनकी जगह दूसरे को मौका देने के पक्ष में है, लेकिन इस सीट पर 25 हजार सिंधी वोटरों ने पार्टी के कदम रोक रखे हैं। मुश्किल इसलिए ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि 90 विधानसभा सीटों के लिए भाजपा के घोषित 89 उम्मीदवारों में सिंधी समाज का एक भी नुमाइंदा नहीं है। अगर वहां सिंधी समाज का नुमाइंदा नहीं दिया तो लंबे समय से भाजपा का मुख्य मतदाता रहा सिंधी समाज नाराज होगा। भाजपा यह खतरा फिलहाल नहीं उठाना चाहती।
बातचीत अभी भी जारी
रायपुर में सिंधी समाज का भाजपा के केंद्रीय संगठन में भी काफी महत्व है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने पिछले दौरे की शुरुआत ही शदाणी दरबार में मत्था टेककर की थी। बताया जा रहा है कि केंद्रीय नेताओं और मुख्यमंत्री के करीबियों के साथ सिंधी नेताओं से बातचीत जारी है। मंगलवार तक इसका समाधान निकल जाएगा।
भा जपा सूत्रों के मुताबिक प्रदेश चुनाव समिति ने रायपुर उत्तर से विधायक श्रीचंद्र सुंदरानी के अलावा, सच्चिदानंद उपासने, आरडीए के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव और पार्टी उपाध्यक्ष सुनील सोनी का नाम आगे बढ़ाया था। इसमें उपासने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रिय हैं। श्रीवास्तव और सुनील सोनी के लिए संगठन लगा है, लेकिन समाज ने श्रीचंद्र को ही समर्थन दिया हुआ है। बताया जा रहा है कि शदाणी दरबार के पीठाधीश युधिष्ठिर लाल खुद मुख्यमंत्री से उनकी पैरवी कर चुके हैं। हालांकि संगठन उनका टिकट काटना ही चाहता था।
श्री चंद्र सुंदरानी का टिकट कटने की चर्चाओं के बीच सिंधी समाज के एक धड़े ने अमर परवानी का नाम आगे बढ़ाया है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक वहां से सिंधी समाज के ही प्रकाश बजाज को मौका देना चाह रहे हैं। रायपुर के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल और राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष छगन मुंदड़ा भी यहां से मजबूत दावेदार हैं। कई प्रमुख नेता उनकी पैरवी भी कर रहे हैं।
Published on:
30 Oct 2018 09:42 am
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