
टिकट के लिए आधी रात के बाद बाबा के दर पर लग रही पूर्व आईएएस से लेकर नेताओं की भीड़
रायगढ़. छत्तीसगढ़ में चुनावी बिगुल बजते ही राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक दलों के नेता टिकट को लेकर एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। यहां तक की दावेदार टिकट के लिए तांत्रिक और बाबा के यहां भी चक्कर लगाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज तीन-चार किलोमीटर दूर स्थित कोसमनारा, सत्यनारायण बाबा की समाधि स्थली की वजह से चर्चित है। यहां बाबा पिछले करीब 20 साल से बिना कुछ खाए-पीये भगवान शंकर की प्रतिमा के सामने धुनी रमाये बैठे हैं। ऐसे में उनका आशीर्वाद लेने के लिए वहां हर दिन आम लोगों की भीड़ लगी रहती है। चुनावी मौसम में इस भीड़ के बीच बड़ी संख्या नेताओं की दिख रही है।
इस भीड़ में जिले के नेताओं के अलावा पड़ोसी जिलों के नेता भी शामिल है। वे रात में बाबा के दरबार मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। सभी बाबा से एक ही आशीर्वाद मांग रहे हैं कि उन्हें उनकी पार्टी से न सिर्फ विधानसभा का टिकट मिल जाए, बल्कि जीत भी सुनिश्चित हो सके। इन नेताओं में पूर्व आइएएस अधिकारी से लेकर कम पढ़े-लिखे नेता तक शामिल हैं।
ऐसी मान्यता है कि सत्यनारायण बाबा एक बार यदि किसी को आशीर्वाद दे दें तो उसकी मनोकामना पूरी होना तय है। इस मान्यता के चलते वर्तमान समय में इसका सबसे अधिक लाभ लेने के लिए अलग-अलग पार्टियों के नेता यहां पहुंच रहे हैं। पत्रिका की टीम नवरात्र के दौरान जब बाबा के दरबार पहुंची तो वहां भक्तों का तांता लगा था। बाबा इशारों में भक्तों को जो संदेश दे रहे थे वहीं पर खड़े आश्रम के सदस्य उसका अर्थ लोगों को बता रहे थे।
कहते हैं बाबा रात 12 बजे ही ध्यान से बाहर आते हैं। ऐसे में यहां रात को भक्तों की भीड़ लगती है। जब आश्रम के लोगों से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि इस समय तो आम भक्तों से अधिक नेताओं का आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने बताया कि यहां कांग्रेस, भाजपा जैसी सभी पार्टी के नेता बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। ये नेता बाबा के आशीर्वाद के बल पर न सिर्फ टिकट पाना चाहते हैं, बल्कि यह चाह रहे हैं कि उनकी जीत भी सुनिश्चित हो जाए।
काश! बाबा की भावनाओं को समझ पाते नेता
सत्यनारायण बाबा 14 साल की उम्र में अपनी जीभ काट कर भगवान शंकर को भेंट कर चुके हैं और तब से आज तक बिना उन स्थान से उठे वहीं बिना खाए पिए धुनी रमाए बैठे हैं। चाहे ठंड हो या गर्मी, फिर चाहे मूसलाधार बारिश कोई भी बाबा को उस स्थान से नहीं हटा पाया। मान्यता है कि बाबा यहां जनकल्याण के लिए समाधि पर बैठे हैं और जब वह पूर्ण होगा तो बाबा स्वयं वहां से उठ जाएंगे। ऐसे में क्या यहां आने वाले राजनेता बाबा की भावनाओं को भी साकार करने का प्रयास करेंगे, या फिर सिर्फ चुनावी मौसम में आशीर्वाद लेकर फिर पुराने ढर्रे पर काम करने लगेंगे।
Published on:
15 Oct 2018 02:35 pm
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