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CG Election 2018: जब एक भी वोट नहीं मिला और चुनाव जीत गए हमारे माननीय

पहले आम चुनाव 1951 और मध्यप्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद 1957 में हुए आम चुनाव में आरक्षित एक सीट पर दो विधायकों का चुनाव होता था।

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CG Election 2018

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राहुल जैन/रायपुर. आजादी के बाद हुए आम चुनाव अपने आप में कई रोचक इतिहास समेटे हुए हैं। पहले आम चुनाव 1951 और मध्यप्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद 1957 में हुए आम चुनाव में आरक्षित एक सीट पर दो विधायकों का चुनाव होता था। 1997 के चुनाव में कुल 57 विधानसभा सीटों पर दो विधायकों को चुना गया था। इसमें छत्तीसगढ़ के हिस्से में आने वाली 20 विधानसभा सीट भी शामिल थी।

दिलचस्प यह है कि इनमें से दो विधानसभा सीट ऐसी थी, जहां आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिल थे, फिर भी नियम के तहत वो विजेता घोषित हुए। इसमें मस्तुरी विधानसभा के गणेश राम और बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा की श्यामा कुमारी का नाम शामिल हैं।

इस वजह से थी यह व्यवस्था
आजादी के बाद हुए चुनाव में आरक्षित वर्ग के लोगों को राजनीति में प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई थी। जिन विधानसभा क्षेत्रों में दोहरे प्रत्याशी निर्वाचित होने की व्यवस्था दी गई थी, उसका आधार मतदाताओं की बहुलता और आरक्षित होने की पात्रता पर निर्भर करता था।

इन सीटों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को भी लडऩे की प्राथमिकता थी। पहले आम चुनाव में मत पत्रों पर कुछ अंकित नहीं करना पड़ता था। प्रत्येक उम्मीदवारों के लिए पृथक-पृथक मतपेटियां होती है। पहले व दूसरे नम्बर पर प्राप्त मत वाले प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया जाता था।

इसी विधानसभा सीट से पंडित श्यामाचरण शुक्ल निर्वाचित हुए थे। आरक्षित वर्ग की विधानसभा सीट से दो प्रत्याशी को चुनने की व्यवस्था इसी चुनाव तक रही। 1962 के आम चुनाव तक यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई थी।

दोहरे विधानसभा सदस्य वाली सीटें
बेमेतरा : शिवलाल, लक्ष्मण प्रसाद
भिलाई : गोविंद सिंह, उदयराम
डोंगरगढ़ : भूतनाथ, विजय लाल
जगदलपुर : महाराजा प्रवीरचंद्र देव, देरहाप्रसाद
कांकेर : प्रतिभा देवी, बिश्राम
आरंग : लखनलाल गुप्ता, जगमोहन दास
धमतरी : झीटकू, पुरुषोत्तम दास
बिन्द्रानवागढ़ : श्यामा कुमार, पंडित श्यामाचरण शुक्ला
महासमुंद : नेमीचंद, बाजीराव मिरी
भटगांव : जितेन्द्र विजय बहादुर, मूलचंद
बलौदबाजार : बृजलाल, नैनदास
मुंगेली : रामलाल, अंबिका साव
मस्तूरी : बशीर अहमद, गणेश राम
कोटा : काशीराम तिवारी, सूरजकुमार
कटघोरा : राजा ललित कुमार, गौरीशंकर शास्त्री
जशपुर : राजा बिजयभूषण सिंहदेव, जोहन
पाल : भंडाारी, कपिलदेव नारायण सिंह
अंबिकापुर : बृजभूषण, प्रीतम कुर्रे
सुरायपुर : महादेव सिंह, धीरेन्द्र नाथ शर्मा
मनेन्द्रगढ़ : रघुवर सिंह, ब्रजेन्द्र लाल