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CGMSC में हो रहा बड़ा गोलमाल, एक साल पहले बनी कंपनी के पास है पांच साल पुराना अनुबंध

निविदा के पूर्व के 5 वर्षों का विनिर्माण अनुबंध अनिवार्य था लेकिन भिलाई की दो कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया

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सीजीएमएससी में हो रहा बड़ा गोलमाल, एक साल पहले बनी कंपनी के पास है पांच साल पुराना अनुबंध

जितेंद्र दहिया.रायपुर . छत्तीसगढ़ दवा निगम के अधिकारियों की मनमानी का एक और मामला सामने आया है। निगम के संचालक द्वारा चहेती कंपनी को लाभ दिलाने के लिए निविदा शर्तों को ही बदल दिया।

बदलाव के मुताबिक निविदा के पूर्व के 5 वर्षों का विनिर्माण अनुबंध अनिवार्य था लेकिन भिलाई की दो कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया। वर्ष 2017 में ही अस्तित्व में आई दो कंपनियां जिनके पास निविदा के पूर्व का 5 वर्षों का अनुबंध होना असंभव था,उन्हें भी योग्य घोषित कर दिया गया।

मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन द्वारा वेयरहाउस उपकरणों के क्रय के लिए निविदा क्रमांक 48 ई (पी)/ सीजीएमएससी / ईक्ूयपी/2017 जारी की थी। इस निविदा में चहेती कंपनी को लाभ दिलाने के लिए दिनांक 01 जून 2017 को निविदा शर्तों में एक संशोधन कर दिया। बदलाव के मुताबिक छत्तीसगढ़ के स्थानीय अनुबंध निर्माताओं (कंट्रेक्ट मैन्युफेक्चर्र) को भी निविदा में भाग लेने के योग्य घोषित कर दिया। जबकि इससे पहले सिर्फ उपकरण के निर्माताओं को ही निविदा भरने की अनुमति थी। निगम के अधिकारियों ने निर्माता कंपनियों से उपकरण खरीद कर कमीशन लेकर बेचने वालों को भी पात्रता देकर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाया है।

२० करोड़ से अधिक का कार्यादेश : प्रबंध संचालक के भिलाई के कारोबारी और उनके पुत्रों की फर्मों के लिए नियमों को ताक पर रख कर अयोग्य कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया गया और अब तक २० करोड से ज्यादा का क्रय आदेश जारी कर दिया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भी निगम के प्रबंध संचालक से उक्त कंपनियों के मालिक से संबंधों के बारे में जानकारी मांगी है लेकिन 3 बार नोटिस जारी करने के बाद भी प्रबंध संचालक द्वारा इओडब्लू को जानकारी नही भेजी गई है।

निविदा में 4 कंपनियों ने हिस्सा लिया । दावा आपत्ति के बाद चारो ही कंपनियों को योग्य घोषित कर दिया गया। संशोधन के मुताबिक निविदा के पूर्व के 5 वर्षों का कंपनी से विनिर्माण अनुबंध अनिवार्य था, लेकिन निविदा में योग्य घोषित दो कंपनियां मोक्षित कारपोरेशन और सी बी कारपोरेशन वर्ष 2017 में ही अस्तित्व में आई थी। ऐसे में इनके पास निविदा के पूर्व का 5 वर्षों का अनुबंध होना असंभव था।

पूर्व में भी सीबी कारपोरेशन द्वारा जाली टर्न ओवर सर्टिफिकेट के माध्यम से निविदा हथियाने केआरोप लगे थे, लेकिन कार्य समिति से जांच लेकर बायो मेडिकल इंजीनियर को सौंप दी गयी। जिसकी जांच की फाइल को विगत कई महीनों से दबा दी गई है।

सीजीएमएसी के प्रबंध संचालक वी रामाराव ने बताया कि निविदा को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। निविदा शर्तों को लेकर जरूरत के हिसाब से बदलाव किए गए थे। किसी को विशेष लाभ देने के लिए नहीं।