19 दिसंबर 2025,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

cgpsc 2022: फर्स्ट  रैंकर कॉमर्स से, ज्यादातर टॉपर इंजीनियर

सीजीपीएससी के टॉपर्स ने साझा किए सक्सेस मंत्र

4 min read
Google source verification
cgpsc 2022: फर्स्ट  रैंकर कॉमर्स से, ज्यादातर टॉपर इंजीनियर

बाएं से दाएं सारिका मित्तल, शिक्षा शर्मा। ऊपर से नीचे श्रेयांश, शुभांगी और मधु।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. सीजी पीएससी के टॉपर (डीसी) में ज्यादातर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। फर्स्ट रैंकर कॉमर्स फील्ड से है। टॉपर्स से हमने उनकी स्टै्रटेजी जानी। हर किसी की स्ट्रैटेजी अलग रही। किसी ने तीसरे तो किसी ने सातवें प्रयास में सफलता हासिल की। कुछ ऐसे भी टॉपर हैं जो यूपीएससी का एग्जाम भी दे चुके हैं। टॉपर्स का कहना है कि पढ़ाई के दौरान निरंतरता जरूरी है। अगर आपमें धैर्य है तो देर-सबेर यह परीक्षा पास कर ली लेंगे। हमने टॉप फाइव अचीवर से बात की।

कंसंट्रेशन के साथ पढ़ें, कभी गिवअप न करें

टॉपर सारिका मित्तल ने कहा कि मैंने मेहनत तो की थी लेकिन फस्र्ट रैंक आ जाएगी यह नहीं सोचा था। पीएससी सालभर की जर्नी होती है। इसके लिए कंसंट्रेशन बहुत जरूरी है। अपनी हॉबी के लिए भी टाइम निकालना होगा। मैं खुद क्रॉफ्ट मेकिंग में इंट्रेस्टेड थी। पढ़ाई के बीच इसमें टाइम दिया करती थी। मैंने स्कूलिंग रायगढ़ से ही की। इसके बाद मैंने किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली से बीकॉम किया। पीएससी के पहले प्रयास में प्रिलिम्स नहीं निकाल पाई थी। हालांकि मेरा गोल शुरू से सिविल सर्विसेस ही रहा है। जो युवा पीएससी की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहूंगी कि इसके लिए पेशेंस के साथ लगे रहिए और कभी गिवअप न करें। जरूर सफल होंगे। इंटरव्यू में मुझसे रायगढ़ का नेशनल और इंटरनेशनल महत्त्व पूछा गया। ज्यादातर सवाल करेंट अफेयर के थे।

मैसेज: पेशेंस के साथ लगे रहिए। पैरेंट्स: पिता अशोक मित्तल- बिजनेसमैन हैं। मम्मी राधा मित्तल होम मेकर।

चंद्रयान-3 और जी-20 के सवाल पूछे

बिलासपुर के श्रेयांश पटेरिया ने तीसरा स्थान हासिल किया है। वे बताते हैं, यह मेरा तीसरा प्रयास था। गुरु घासीदास विवि से बीटेक करने के बाद जॉब की ट्रेनिंग के लिए नोएडा गया था। उसी दौरान मुझे लगा कि सिविल सर्विसेस में जाना है। यह मेरा तीसरा प्रयास था। मैंने सेल्फ स्टडी की है। पढ़ाई की टाइमिंग रात की थी। मैंने एनसीईआरटी की 11वीं-12वीं की किताबें पढ़ीं। इंटरव्यू में मुझे चंद्रयान-3 और जी-20 से जुड़े सवाल पूछे गए। मैंने हॉबी में फिलॉसफी और ट्रेवलिंग लिखा था। इससे जुड़े सवाल भी पूछे गए।

मैसेज: जो अच्छा लगे वही करें, खुशी भी मिलेगी। पैरेंट्स: पिता ललितप्रकाश पटेरिया विवि में प्रोफेसर हैं जबकि मम्मी रेणु पटेरियाहोममेकर हैं।

पिता क्लर्क, बेटी बनी ऑफिसर

बिलासपुर की शिक्षा शर्मा को चौथी रैंक मिली है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। वे बताती हैं, थर्ड ईयर की एंडिंग के दौरान मैंने पीएससी परस्यू किया। एवरेज छह से सात घंटे पढ़ाई करती थी। यह मेरा तीसरा अटेंप्ट था। नोट्स मेकिंग मेंस से शुरू की। इंटरव्यू में प्रोफाइल बेस्ड सवाल ही पूछे गए। जिसमें महिला सशक्तिकरण और राज्य में बेरोजगारी दर शामिल थी। मैंने संगीत में विशारद किया है। सिंगिंग मेरी हॉबी है। तैयारी के वक्त कभी-कभी डीमोटिवेट हुई लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति से उबर जाती थी।

मैसेज: हॉबी को जीएं। सफलता के साथ खुशी भी जरूरी है। पैरेंट्स: पापा पवन शर्मा क्लर्क हैं, मम्मी होममेकर।

एनआईटी पासआउट मधु सातवें अटेंप्ट में बनी डीसी

बिलासपुर की मधु गभेल को मैरिट में सातवां स्थान मिला है। उन्होंने 2013 में एनआईटी रायपुर से आईटी में बीटेक किया है। उसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। वहां से लौटने के बाद सीजी पीएससी का प्रिपरेशन शुरू किया। 2015 में पीएससी के थ्रूव नजूल तहसीलदार के लिए सेलेक्ट होकर जांजगीर कलेक्ट्रेट में पदस्थ हुईं। वे कहती हैं, इस जॉब के बाद मैं एक्सेप्ट नहीं कर पा रही थी, मुझे मिनिमम डीसी तो चाहिए ही था। क्योंकि मैं यूपीएससी एग्जाम भी दे चुकी थी। नए अभ्यर्थियों से कहा, इस परीक्षा में बहुत ज्यादा पेशेंस की जरूरत होती है। इनर मोटिवेशन के बिना आप कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि यह लैंदी एग्जाम है। रिपीटेशन के चांस बने रहते हैं। इसलिए सेल्फ मोटिवेशन जरूरी है। हमेशा अलर्ट मोड में रहें। क्या कुछ नया चल रहा है इस पर ध्यान रखें। एक बात हमेशा याद रखें कि हम इंसान हैं कोई मशीन नहीं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्डन न हो। सेलेक्ट ही पढ़ें। मैं बास्केटबॉल और भालाफेंक में नेशनल खेल चुकी हूं इंटरव्यू में मेरी प्रोफाइल से जुड़े सवाल ही पूछे गए।

पैरेंट्स: पिता नारायण प्रसाद गभेल कृषि विकास अधिकारी हैं। मम्मी रश्मि गभेल मंडी अध्यक्ष हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पीएससी में काम आई

रायपुर की शुभांगी गुप्ता ने पांचवां स्थान बनाया है। बीआईटी दुर्ग से बीटेक (सीएस) के बाद वे सीडीएस की तैयारी में जुटीं लेकिन मैरिट में नाम नहीं आया। इसके बाद सीजीपीएससी का रुख किया। यह मेरा सेकंड अटेंप्ट रहा। इंजीनियरिंग के बाद मैंने पाया कि नॉलेज तो बहुत था लेकिन मैं उसे चैनेलाइज नहीं कर पाई थी। इंजीनियरिंग के दौरान सिस्टेमैटिक डाइग्राम के लिए फ्लो चार्ट बनाया करते थे। वह पीएससी की तैयारी में बहुत काम आया। कम कंटेंट को अच्छे से प्रेजेंट करना पीएससी में काम आया। इंटरव्यू में सबसे पहले तो मेरे नाम का मतलब पूछा गया। इसके बाद रायपुर के दार्शनिक स्थल और सीमेंट प्लांट की जानकारी मांगी गई। आईओटी और कंटेंट राइटिंग से जुड़ी बातें पूछी गईं। एक सवाल पर शुभांगी बोलीं- मेरे बैच के सभी लोग जॉब कर रहे थे। कभी-कभी डीमोटिवेट होने पर लगता था अपने को भी जॉब करना था। लेकिन यह कुछ घंटे की बात थी। अगले दिन फिर से उसी एनर्जी के साथ पीएससी की तैयारी में जुट जाते थे।

मैसेज: डीमोटिवेशन कुछ समय का है, इससे उबरकर आगे बढ़ें। पैरेंट्स: पिता हरिनारायण गुप्ता बिजनेसमैन हैं और मम्मी संध्या गुप्ता सोशल वर्कर।