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ED का बड़ा खुलासा: CGPSC में 3 करोड़ में बिके पर्चे, DMF में 31 करोड़ बिचौलियों ने हड़पे, कब किसे मिला पैसा जानिए पूरा राज

CGPSC DMF Scam: करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन और कमीशनखोरी का खेल खेला गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इन दोनों मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं। बताया कि विकास चंद्राकर ने 2.80 करोड़ रुपए ऐंठे..
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CGPSC Scam, ED Acction

CGPSC- DMF घोटाले में सतपाल छाबड़ा और उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार ( Photo - Patrika Create )

District Mineral Foundation scam: सीजीपीएससी भर्ती गड़बड़ी और जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़े खुलासे किए हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से साफ हो गया है कि दोनों ही मामलों में करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन और कमीशनखोरी का खेल खेला गया था। 1 सितंबर को ईडी ने धमतरी और जशपुर जिलों में पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी चेतन बोरघरिया, उनके पीए केके चंद्रवंशी और भाजपा नेता व पटवारी कमलेश सहित 5 ठिकानों पर छापेमारी की।

CGPSC DMF Scam: उम्मीदवारों से करीब 3 करोड़ रुपए ऐंठे

सीजीपीएससी परीक्षा में पर्चा उपलब्ध कराने के नाम पर उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने उम्मीदवारों से करीब 3 करोड़ रुपए ऐंठे थे। इसमें से 2.80 करोड़ रुपए अकेले विकास चंद्राकर ने लिए। इस अवैध खेल में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के पीए केके चंद्रवंशी और ओएसडी चेतन बोरघरिया के नाम और पद का जमकर इस्तेमाल किया।

गैर-कानूनी तरीके पैसे लेकर प्रश्न पत्र चुने हुए उम्मीदवारों को दिए

वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में गैर-कानूनी तरीके से पैसे लेकर प्रश्न पत्र आरोपियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को दिए गए। इस धोखाधड़ी के जरिए कई लोगों ने डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे बड़े पद हासिल किए। सीबीआई और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

डीएमएफ में 31 करोड़ की कमीशनखोरी

दूसरी ओर, डीएमएफ घोटाले में गिरफ्तार सतपाल सिंह छाबड़ा को सिंडिकेट का मुख्य बिचौलिया और फाइनेंशियल कोऑर्डिनेटर पाया गया है। बैंकिंग लेनदेन की जांच से खुलासा हुआ कि सतपाल को अकेले 31 करोड़ रुपये का कमीशन मिला था। इस काली कमाई को उसने अपने परिवार के सदस्यों और खुद के नियंत्रण वाली संस्थाओं के बैंक खातों में खपाया।

बिचौलियों ने 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला

जांच में सामने आया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने डीएमएफ ट्रस्ट का सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और वेंडरों के सिंडिकेट ने जमकर दुरुपयोग किया। वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान 9188.20 करोड़ रुपए के फंड को प्राथमिकता वाले कामों से भटकाकर सप्लाई-ओरिएंटेड कार्यों में लगा दिया गया। इस फर्जीवाड़े में फंड का बड़ा हिस्सा राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के जरिए भेजा गया, जहां बिचौलियों ने 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला और इसे अफसरों व प्रभावशाली लोगों में बांटा। सतपाल ने ही वेंडरों को वर्क ऑर्डर और पेमेंट दिलाने के एवज में कटमनी इकट्ठा कर सिंडिकेट में बांटी थी। ईडी मामले की आगे की जांच कर रही है।