
Chhattisgarh Election 2023: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनौती अब भी बरकरार, 90 में से 20 सीटें नक्सल प्रभावित
रायपुर. छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनौतियां पहले से कम तो हुई हैं, मगर पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। लिहाजा इस बार के विधानसभा चुनाव भी शासन-प्रशासन से लेकर सुरक्षाबलों के लिए भी बड़ी चुनौती रहने वाली है। छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में से है जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्र के साथ वहां हुई वारदातें चर्चाओं में रहती हैं। यही कारण है कि नवंबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सबकी नजर यहां के उन विधानसभा क्षेत्र पर है, जिन्हें नक्सल प्रभावित माना जाता है। 20 विधानसभा सीटें नक्सल प्रभावित मानी गई हैं राज्य में दो चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने वाला है। पहला चरण सात नवंबर को और दूसरा 17 नवंबर को। यहां की 90 विधानसभा सीटों में से 20 विधानसभा सीटें नक्सल प्रभावित मानी गई हैं, जिनमें से 12 बस्तर संभाग और आठ राजनांदगांव की है। इन क्षेत्रों में मतदान सात नवंबर को होगा। राज्य में पहले चरण में जिन नक्सल प्रभावित 20 विधानसभा सीटों पर मतदान होने वाला है उनमें से 19 स्थान पर कांग्रेस का कब्जा है।
बस्तर संभाग तो पूरी तरह भाजपा मुक्त है, जबकि राजनांदगांव की आठ विधानसभा सीटों में से सात पर कांग्रेस और एक पर भाजपा का कब्जा है। इन इलाकों को नक्सली गतिविधियों के चलते चुनाव आयोग ने गंभीर माना है और यही कारण है कि पहले चरण में इन सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार दोनों की ओर से समय-समय पर नक्सल प्रभावित जिलों को लेकर जारी की गई जानकारी में इस बात की पुष्टि होती है कि बीते कुछ समय में छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा में बड़े पैमाने पर कमी आई है।
जानकारी के मुताबिक इन स्थानों पर माओवादियों की गतिविधियों पर अंकुश लगे और वह मतदान में किसी तरह का परेशानी पैदा न कर सके, इसके लिए 50 हजार से ज्यादा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती किए जाने की तैयारी है। नक्सली संगठन चुनाव बहिष्कार का ऐलान करने के साथ-साथ आम मतदाता को धमकाते भी हैं। यहां छत्तीसगढ़ पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षाबलों के जवानों को भी तैनात किया जा रहा है। वहीं चुनाव आयोग और प्रशासनिक अमले ने उन क्षेत्रों को भी चिन्हित कर लिया है जहां अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत है।
नक्सली हिंसा और किसी भी तरह की वारदात को रोकने के मकसद से केंद्र सरकार ने राज्य के 24 नेताओं को विशेष सुरक्षा प्रदान की है ताकि कोई भी राजनेता इन समाज विरोधी तत्वों के निशाने पर न आ सके। इस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और मीडिया विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि केंद्र ने यह फैसला राज्य को बदनाम करने के लिया है, जबकि राज्य में नक्सली गतिविधियां पहले के मुकाबले बहुत कम हुई हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जिन नेताओं को यह सुरक्षा मुहैया कराई गई है, क्या उन्होंने कभी राज्य अथवा केंद्र सरकार को सुरक्षा के संबंध में आवेदन किया भी था। कांग्रेस और दूसरे दलों के नेताओं को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई। राज्य में पहले चरण में जिन इलाकों में चुनाव होना है वह मुख्य रूप से जनजाति बाहुल्य है और भाजपा के लिए इसमें घुसपैठ करना आसान नहीं है।
Published on:
15 Oct 2023 08:09 pm
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