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झोपड़ीनुमा सरकारी स्कूल की बदली सूरत, अब लोग कहते हैं- प्राइवेट स्कूलों से भी अच्छा है यह स्कूल

खास बात यह है कि यहां पहली से पांचवीं क्लास के बच्चों के लिए लाईब्रेरी भी है।

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CG News

चंदू निर्मलकर@रायपुर. आम तौर पर सरकारी स्कूल खस्ताहाल बिल्डिंग, साफ-सफाई का अभाव और पठन-पाठन की खराब दशा के लिए जाना जाता है। लेकिन शहर में एक एेसा प्राथमिक सरकारी स्कूल है, जहां की व्यवस्था किसी अच्छे निजी स्कूल से बेहतर है। स्कूल को आधुनिक संसाधनों से लैस कर पठन-पाठन के अनुकूल वातावरण बनाने का श्रेय जाता है रोटरी कास्मो क्लब को। क्लब ने इस स्कूल को गोद लेकर उसे नया कलेवन प्रदान किया। क्लब के सदस्यों के प्रयासों से यहां बच्चे बड़े-बड़े कमरों में टेबल कुर्सियों में बैठकर पढ़ाई करते हैं। उनके खेलने के लिए क्रिकेट पिच और वॉलीबॉल कोर्ट है। हर्बल गार्डन भी स्कूल की शोभा बढ़ा रहा है। खास बात यह है कि यहां पहली से पांचवीं क्लास के बच्चों के लिए लाईब्रेरी भी है। इसके अलावा बच्चों को योग की भी ट्रेनिंग दी जाती है। स्कूल में आधुनिक खेल सामानों के साथ बच्चों के बाल मन को सवारा जा रह है। खेलों के प्रति लगाव देखकर शिक्षक भी उन्हे प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे है।

इन्होंने ने संभाली जिम्मेदारी
रोटरी कास्मो के पूर्व अध्यक्ष रोहित जैन ने बताया कि डूमरतलाब प्राइमरी स्कूल को प्रशासन ने बंद करने का आदेश दे दिया था। इसके बाद संस्था ने स्कूल को गोद लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी ली। राहुल जैन, दीपक खरे, कीर्ति व्यास, विवेक जग्गी, डीसी सिकरवार, सहित अन्य लोग संस्था के साथ जुड़े और स्कूल की स्थिति को सुधारने के लिए आर्थिक योगदान दिया। रोहित बताते हैं कि उन्हें जब भी अपनी खुशी बांटना होता है, तब वह यहां बच्चों के बीच चले आते हैं।

कॉलेज स्तर की लाइब्रेरी वाला सरकारी स्कूल
राज्य का यहां संभवत: एकमात्र ऐसा सरकारी प्राथमिक स्कूल है जहां बच्चों के लिए कॉलेज की तर्ज पर लाइब्रेरी बनाई गई है। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के स्तर के अनुसार प्रेरक कहानियों, कॉर्टून,महापुरुषों की जीवनी, कविताओं और धर्म ग्रंथों की हजारों किताबें उपलब्ध हैं।

हड़ताल में भी हो रही पढ़ाई

छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की वजह से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था ठप हो गई। लेकिन शहर के रोटरी कास्मो क्लब प्राथमिक स्कूल के बच्चों की पढ़ाई हड़ताल में भी जारी है। प्रिंसिपल दिलीप कुमार भगत ने बताया कि यहां हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुआ। हड़ताल के पहले दिन से ही यहां आरआईटी कॉलेज से आए 25 छात्र बच्चों को पढ़ा रहे हैं। हालांकि स्कूल के एक शिक्षक को छोड़कर अन्य हड़ताल पर चले गए हैं।

हैप्पी स्कूल के नाम से है प्रसिद्व
रोटरी कास्मो क्लब सकारी प्राथमिक स्कूल अब शहर में हैप्पी स्कूल के नाम से फेमस हो रहा है। यहां के बच्चों की शिक्षा के लिए सहज योग सहित अन्य समाजिक संस्थाओं के लोग समय-समय पर बच्चों के बीच पहुंच कर मोटिवेशन कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। साथ ही स्कूल को जरूरत का समान दान करते हैं। उनके नेक इरादों का ही परिणाम है कि आज यह स्कूल निजी स्कूलों से बेहतर हालत में है।

एेसे बदली स्कूल की सूरत
शहर के डूमरतालाब में स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल, बीते १७ वर्षों से रोटरी कास्मो डूमरतालाब प्राथमिक स्कूल के नाम से जाना जाता है। स्कूल प्रिंसिपल दिलीप कुमार भगत ने बताया कि 1998 में जब वह यहां आए, तब स्कूल की हालत बेहद खराब थी। बच्चे झोपड़ीनुमा भवन में पढ़ाई करते थे। बारिश में यहां पानी रिसता था। इसके चलते हमेशा हादसे की आशंका सताती रहती थी। इसके कारण गर्मी में तेज धूप में बच्चों को बाहर बैठकर पढ़ाई करना पड़ता था। यहां लोग अपने बच्चों को भेजते नहीं थे। बच्चों की कम संख्या के कारण प्रशासन ने इसे बंद करने का आदेश भी दे दिया था। इसी बीच रोटरी कास्मो क्लब ने स्कूल को गोद लेकर सुधार किया। अब इस स्कूल में हर पहली से पांचवी तक के बच्चों को हर वो सुविधा मिलती है, जो प्राइवेट स्कूलों में उपलब्ध होती है।