
रायपुर। गीत के जनम कोनो अनजान कवि के मुंह ले लोकजीवन म होथे। इही सेती लोकगीत, लोकजीवन के सिंगार नोहे, बल्कि वोकर आत्मा आय। ए लोकगीत हमर खेतिहर समाज के जीवन पद्धति अउ संस्करीति के दरपन आय। बरसों ले परचलित लोकगीत वाचिक परंपरा के अइसे बहाव आय, जेमा वोकर अन्तरमन के व्यथा-कथा छलकथे।
लोकगीत अपन संस्करीति के मुंह बोलत फोटो आय। लोक के भाउक अउ निरमल मन जनम ले मरन तक लोकगीतमन के सहारा खोजथे। जनम ले मरन तक ही नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ म तो नारीमन के महतारी बने के खुसी म अम्मल म सात महीना के रथे तभे सधौरी गीत गाए के परंपरा हे।
महन मा खड़े बालम, अपन रानी ला मधु पीपर पीये बर मनावत हे। महना मा ठाढि़ बालमजी, अपन रनिया मनावत हो। रानी पीलो मधुर पीपर, होरिल बर दूध आहें हो।
रानी कथे- करू कसैल पीपर ला कइसे पीयंव? मोर दांत तो कपूर कस उज्जर हे। कइसे के पियऊं करू रायर, अउ झर कायर हो। कपूर कस मोर दांत पीपर कइसे पियव हो।
बालम कथे- मधुर पीपर नइ पीबे त कर लेहूं दूसर बिहाव। पीपर के झार पहर भर, मधु के दुई पहर हो। सउत के झार जनम भर, सेजरी बंटोतिन हो।
सउत के झार जनम भर ला सुनके रानी कटोरा ला उठाके मधु पीपर पी लेथे - कंचन कटोरा उठावव, पीलेंहू मधु पीपर हो।
लइका के जनम के छह दिन म छट्ठी होथे। परवार अउ कुटुम्ब के मनखेमन इही दिन 'सांवरÓ बनाथे। लइका के नांव धरे के संगे-संग सोहर गीत गाए के परंपरा हे।
पहिली गनेस पद गावौं, मैं चरन मनावौं, हो ललना बिधन हरन जन नायक हो, ललना सोहर पद गावौं हो...।
लोरी गीत : लइका ह जब पदोथे, नइते पेट सेंके के बखत रोथे त एदे गीत ल गावत-गावत भुलवारथे।
तरी नरी नाना रे बेटा, तरी नरी नाना गा। सुति जबे सुति जबे बेटा सुति जबे गा।
मंगनी : उंचे चौरा बबा ओ चोंपलिया, धन तुलसी के पेड़ हो। जेहि तरि बैठिन बेटिया वाही तरी हिंगुन सोना हो।
मड़पाच्छाछन गीत : सरई सइगोना के दाई, मड़वा छवई ले, बरे बिहई के रहि जाय कि ये मोर दाई, सीता ला बिहाबे राजा राम।
चुलमाटी गीत : तोला माटी कोड़े ला नइ आवय मीत धीरे-धीरे, तोर बहिनी के कनिहा ला तीर धीरे-धीरे।
तेल चघनी गीत : एक तेल चढिग़े दाई हरियर-हरियर, वो हरियर-हरियर, मड़वा मा दुलरू तोर बदन कुम्लाय।
नहडोरी गीत : तोला झूलना झूले ला नइ आवे हो दुलरू बाबू, तोर माई ले के खोर गिंजरा, खा ले खा ले मिठई पेड़ा, तोर बहिनी ला लेगे साहेब डेरा।
दे तो दाई अस्सी वो रूपैया के सुन्दरी ला लातेंव बिहाय। सुंदरि-सुंदरि बाबू तुम झन रटिहौ, के सुंदरि के देस बढ़ दूर।
बारात गीत :गांव अवधपुर ले चले बरतिया, गांवे जनकपुरी जाये। ये हो राम गांवे जनकपुरी जाये। राजा जनक के पटपर भांठा तंबू ला देवय तनाय। ये हो राम तंबू ले देवय तनाय।
पांच रुपैया के भेड़वा बिसायेन
भेड़वन दारी रे तोरे लगवार भेड़वा,
खाल्हेच खाल्हे लेई चलो देवरा
उपरे हो देवरा परथे गोहारे उपरे।
घमसा नाच गीत : ये पार नदी वो पार नदी, बीच म भांठा कछार। हमर भइया के बिहाव होवत हे लगे हे रुपिया हजार। वो भइया लगे हे रुपिया हजार।
परघनी गीत : हाथ धरे लोटिया, खांधे मा धरे पोतिया। सगरी नहाय चले जाबो पनिया हिलौरे गौरी नहावय परगे महादेव के छांही।
भड़वनी गीत : नदिया तीर के पटुवा भाजी, उल्हवा-उल्हवा दिखथे रे, आये हे बरतिया ते मन, बुढ़वा-बुढ़वा दिखथे रे।
भांवर गीत : मधुरि-मधुरि पग धारव हो दुल्हिन नोनी तुहंर रजवा के, अंग झन डोलय हो। दुल्हा बाबू तुंहर रनिया के अंग झन डोलय हो।
टिकावन गीत : कोन तोर टिके नोनी अचहर-पचहर, कोन तोर टिके धेनु गाय। दाई तोर टिके नोनी अचहर-पचहर वो, ददा तोर टिके धेनु गाय।
सोहाग गीत : बांस लागे पोंगरी, पुरावन लागे कलगी, नोनी के मांग म सुहाग भरव ना, सबके सुहाग बहिनी अइसन-तइसन नानी दाई के सुहाग मा सुहाग बाढ़े ना।
बिदा गीत : आजि के चंदा नियरे वो नियरे, दाई मैं काली जाहूं बड़ दूरे।
मड़वा बिसरजन गीत : धन-धन बैंहा तुम्हरे ए राजा , हरिना मारन नइ आवै ए राजा। हरिना तो मारथे उचाटे ए राजा। ओली-ओली खाय गुर चिंउरा ए राजा।
बंगला अजब बने रे भाई, ए बंगला
के दस दरवाजा, पवन चलाव हंसा।
जावत-जावत कोनो नइ देखय,
करे इसबर मनसा।
गंगोरियामन के सुवागत गीत : गंगा बड़े गोदावरी, तीरथ बड़े केदार। सबले बड़े अजोधिया हो, जिंहे राम लिये अवतार हो। रंग महल मा उड़त हे गुलाल हो, हो मुरली वाले बजइया। यसोदा मइया के लाल हो, तोर चरन के लागत हे मोला आस हो, मुरली वाला बजइया।
Published on:
09 May 2018 06:42 pm
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